देश के पांच राज्य महामारी की पहली लहर को पार कर चुके हैं। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, गुजरात और मध्यप्रदेश में हालात ऐसे हैं कि यहां पहली लहर कोसों दूर हो चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो दूसरी लहर चार गुना ज्यादा तेज है। इन राज्यों में पिछले साल पहली लहर के दौरान एक दिन में 10 से 20 हजार तक केस आ रहे थे लेकिन अब यह आंकड़ा 40 से 50 हजार तक पहुंच गया है।
संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा जांच के लिए राज्यों को निर्देश दिए जा रहे हैं। बावजूद इसके कोविड-19 के जांच आंकड़ों में बदलाव नहीं आया है। बीते 21 दिन में संक्रमण दर दो से बढ़कर 11% पार हो चुकी है लेकिन हर दिन जांच की स्थिति औसतन 10 से 11 लाख के बीच है।
पिछले एक दिन में केवल आठ लाख सैंपल की जांच हो सकी, जिसमें 11.58% से ज्यादा संक्रमित मिले। कुल सक्रिय मामलों में इन राज्यों की 75.88% भागीदारी है। कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर बात करें तो आठ राज्यों में नई मौतों का योगदान 84.52 फीसदी है।
26वें दिन नए केसों में बढ़ोतरी संक्रमण दर 5.89 फीसदी
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, एक दिन की सबसे बड़ी वृद्धि के बाद देश के कुल संक्रमितों की संख्या 1,25,89,067 पर पहुंच गई और अब तक 1,65,101 लोग जान गंवा चुके हैं। अब तक 1,16,82,136 मरीज ठीक हुए हैं।
लगातार 26वें दिन नए मामलों में बढ़ोतरी के चलते देश में कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 7,41,830 हो गई जो कुल संक्रमण का 5.89 फीसदी है, जबकि रिकवरी दर और नीचे गिरकर 92.80 फीसदी पर पहुंच गई है। इस दौरान 52847 मरीजों को स्वस्थ घोषित किया गया। इससे पहले 12 फरवरी को देश में सबसे कम सक्रिय मरीजों की संख्या 1,35,926 थी जो कुल संक्रमण का 1.25 फीसदी थी।
तेजी से बढ़े जांच
आईसीएमआर के मुख्य संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. समीरन पांडा का कहना है कि अब वक्त कोरोना की जांच को तेजी से बढ़ाने का है। पिछले साल की तुलना में नए मामले काफी तेजी से आ रहे हैं तो राज्यों में जांच पिछली बार से अधिक होनी चाहिए। हर दिन यह आंकड़ा 20 लाख तक पहुंचने पर ही सही स्रोत और संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार पांच राज्य कोरोना की पहली लहर को पार कर चुके हैं लेकिन अगले कुछ दिन में करीब छह से सात राज्य भी इसी स्थिति में आने वाले हैं।
आईसीएमआर के अनुसार देश में इस वक्त 2442 लैब में कोरोना की जांच हो रही है। अगर प्रतिदिन की क्षमता को लेकर बात करें तो एक दिन में 22 लाख से अधिक सैंपल की जांच हो सकती है लेकिन राज्य 50% क्षमता का भी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।