फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिन्होंने लूटा गरीबों का पैसा, उन्हें लौटाना पड़ेगा: PM

Wed, 19 Apr 2017 06:31 AM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
विज्ञापन
- फोटो : pti
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि गरीबों का पैसा लूटने वालों को इसे लौटाना पड़ेगा। कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ट्विटर पर अपने एक फालोअर के ट्वीट के जवाब में पीएम ने यह बात कही।
विज्ञापन


उन्होंने ट्वीट किया, ‘भारत में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। जिन लोगों ने गरीबों और मध्यम वर्ग के पैसे को लूटा है, उन्हें इसे लौटाना होगा।’ इससे पहले, उनके फालोअर ने ट्वीट किया था, ‘...भ्रष्टाचार ने न सिर्फ हमारी गाढ़ी कमाई लूटी है बल्कि हमारी गरिमा को भी लूट लिया है।’

वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों का माल्या मामले में कहना है कि माल्या का प्रत्यर्पण आसान नहीं होगा। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की अदालतों द्वारा बार-बार समन भेजने के बावजूद उन्हें वापस नहीं लाया जा सका है, जबकि ब्रिटेन की अदालतें तो ज्यादा स्वतंत्र हैं इसलिए वे उन्हें आसानी से प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं दे सकतीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

50 प्रत्यर्पण के मामलों में से महज एक में मिली सफलता

- फोटो : Reuters
कुछ ऐसा ही नजरिया है वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी और दुष्यंत दवे का। तुलसी का मानना है कि भारत सरकार ने प्रत्यर्पण का अनुरोध करते हुए माल्या के खिलाफ हालांकि ठोस सबूत भेजे हैं लेकिन ब्रिटेन की अदालतें स्वतंत्र रूप से इनका मूल्यांकन कर तय करेंगी कि ये साक्ष्य उनके प्रत्यर्पण के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा माल्या की गिरफ्तारी और उसके तुरंत बाद जमानत पर रिहाई दर्शाता है कि उन्हें स्वदेश लाना आसान नहीं होगा।

तुलसी ने कहा कि अमूमन प्रत्यर्पण के अनुरोध पर गिरफ्तारी के 60 दिन बाद जमानत दी जाती है लेकिन माल्या को उसी दिन राहत मिल गई। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन को प्रत्यर्पण के 50 अनुरोध भेजे जा चुके हैं जिनमें सिर्फ एक अपराधी का ही प्रत्यर्पण हो पाया है।

कुछ यही नजरिया रखते हुए दवे कहते हैं कि वहां की अदालतें स्वतंत्र हैं और इतनी आसानी से प्रत्यर्पण नहीं दे सकतीं। हालांकि उन्होंने वहां की अदालतों की प्रक्रिया के बारे यह कहते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि वह इस मामले में उतने अनुभवी नहीं हैं। कई अन्य वरिष्ठ वकीलों ने भी नाम न छापने की शर्त पर ब्रिटेन की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को पेचीदा बताया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें