प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ललित कला पुरस्कार
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कला के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को हर साल दिया जाने वाला देश का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ललित कला पुरस्कार इस साल युवाओं के नाम रहा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 15 लोगों को बुधवार को ये पुरस्कार प्रदान किए जिनमें 12 युवा कलाकार शामिल हैं।
इन युवाओं की कृतियों से प्रभावित राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उत्तम पचारणे ने कहा इससे यह जाहिर है हमारी कला की धरोहर जिम्मेदार पीढ़ी के हाथों में है। जिन युवा कलाकारों को पुरस्कार मिला हैं उनमें से ज्यादातर की कलाकृतियां सामाजिक मुद्दों पर आधारित हैं। इनमें महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक मुक्ति, प्राकृतिक छरण, मानवीय व जीवन मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे रहे। ज्यादातर युवा 25 से 35 साल आयु वर्ग हैं।
केरल के अनूप मंजुखी ने लकड़ी के बंडलों को ऑयल पेंट से कैनवास पर उतारा है। जो संगठन और शक्ति की ताकत दिखाती है। महाराष्ट्र के डेविड मालाकर ने एक बिल्ली की अपने बच्चों से बातचीत को चित्रित किया है। जो विकास के नाम पर बसे कंकरीट के शहरों में अपने आशियाने को लेकर फिक्रमंद है।
देवेंद्र कुमार खरे की पेड़ों के बेतहासा कटान, फारुक अहमद हलदर ने गरीबी, हरी राम कुम्भावत ने मानवीय मूल्यों व रिश्तों, केसरी नंदन प्रसाद ने काल चक्र, मोहन कुमार ने मनुष्यता और उसके करीब रहने वाले जंतुओं, सागर बसंत कांबले ने गुफा चित्रों को, सतविंदर कौर ने महिलाओं में आए बदलाव, सुनील थिरुवनियूर ने जंगल और वनस्पतियों को कला का रूप दिया है। मंडी हाउस स्थित रवींद्र भवन में लगे राष्ट्रीय कला मेले में युवाओं की इन कलाकृतियों को देखा जा सकता है।