कर्नाटक के बेलागवी जिले के सावादत्ती तालुक में आने वाले इंचल गांव को शिक्षकों का गांव कहा जाता है। बताया जाता है कि यहां तकरीबन हर घर में एक शिक्षक हैं, जिनकी प्रदेश में अच्छी खासी डिमांड है। इस गांव के हर अभिभावक चाहते हैं कि उनका बेटा बड़ा होकर शिक्षक बने।
जिला मुख्यालय से तकरीबन 41 किमी दूर इस गांव की आबादी छह हजार है। इसमें करीब 600 से अधिक शिक्षक हैं, जो कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में पढ़ाते हैं। वहीं, गांव में बड़े पैमाने पर युवा ट्रेनिंग प्रोग्राम कर चुके हैं और अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।
1970 में इस गांव में सिर्फ एक प्राइमरी स्कूल और 8 शिक्षक थे। इसके आगे की पढ़ाई के लिए लोगों को बैलहोंगल कस्बे में जाना पड़ता था। इससे छात्रों को बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसके बाद शिवानंद भारती स्वामी ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू किया। नतीजतन गांव में रहने वाले शब्बीर मिराजन्नावर के परिवार में 13 शिक्षक हैं। यहां हर घर में औसतन 5 शिक्षक हैं।