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Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर में मिल गई दहशतगर्दों की कुंडली, ये खास दस्ता करेगा आतंकियों के मददगारों को बेनकाब

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 19 Jun 2024 06:31 PM IST

सार

विभिन्न सुरक्षा बलों एवं जांच एजेंसियों की मदद से आतंकियों के हमदर्द दबोचे जाएंगे। इसके लिए सुरक्षा बलों के खास निहत्थे दस्तों को काम पर लगाया गया है। वे ऐसे लोगों का पता लगाएंगे, जो जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकियों के लिए सप्लाई चेन का काम करते हैं।
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बेनकाब होंगे आतंकियों के मददगार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स


दो तरह से होगा खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान

सूत्रों का कहना है कि अब दो तरह से खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान होगा। सरकारी विभागों में जो भी आतंकियों के मददगार हैं, उनकी सूचना त्वरित गति से केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'मल्टी एजेंसी सेंटर' (मैक) तक पहुंचेगी। हालांकि एक ही समय पर वह सूचना, जम्मू कश्मीर में मौजूद सेना, जेकेपी और सीआरपीएफ के साथ साझा होगी। केंद्रीय एजेंसियों के विश्वस्त सूत्रों ने बताया, जम्मू कश्मीर में अब बड़े पैमाने पर खुफिया दस्ते तैयार किए गए हैं। ये दस्ते 24 घंटे लोगों के बीच में रहेंगे। सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी बनकर प्रशासनिक कार्यालयों में आतंकियों के मददगारों का पता लगाएंगे।


संदिग्धों पर ऐसे रहेगी पैनी नजर

एक दस्ता ऐसा भी तैयार किया गया है जो संदिग्धों के मोबाइल फोन पर नजर रखेगा। ऐसा बताया जा रहा है कि जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान के सिम इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सरकारी विभागों में आतंकियों के मददगारों के पास ऐसे ही सिम कार्ड बताए जा रहे हैं। इन्हीं मददगारों को 'ओवर ग्राउंड वर्कर' भी कहा जाता है। ये लोगों के बीच रहते हैं, इसलिए इन पर किसी को शक नहीं होता। सूत्रों ने बताया, सुरक्षा बलों के अभियानों से जुड़ी जानकारी को भी साझा करने का पैटर्न भी बदला जा रहा है। अब एक ऐसा पुख्ता पैटर्न तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से कोई भी सूचना, 'ओवर ग्राउंड वर्कर' तक न पहुंच सके।


इन लोगों पर रहेगी नजर

निहत्था दस्ता, स्कूल एवं कालेज मैदान, बस टर्मिनल, रेल, बैंक, वन विभाग के सभी भवन, राजस्व महकमा, पुलिस और जल आपूर्ति से जुड़े कर्मचारियों पर नजर रखेगा। घने जंगल में राजस्व और वन विभाग के कर्मचारियों का आवागमन लगा रहता है। पैमाइश का काम हो या पेड़ों की देखरेख का, अब यह सब नजर में रहेगा। यह भी पता चला है कि 'ओवर ग्राउंड वर्कर', सीधे तौर पर आतंकियों के संपर्क में नहीं रहते। वे इसके लिए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' की प्रॉक्सी विंग 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और 'जैश-ए-मोहम्मद' की प्रॉक्सी विंग 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) के सदस्यों के संपर्क में रहते हैं। यहां से उन्हें आतंकियों की मदद और तरीके को लेकर दिशा निर्देश मिलता है। यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू कश्मीर (यूएलएफजेएंडके), मुजाहिद्दीन गजवत-उल-हिंद (एमजीएच), जम्मू कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (जेकेएफएफ) और कश्मीर टाइगर्स जैसे आतंकी संगठन भी 'ओवर ग्राउंड वर्कर' को लेकर सक्रिय रहते हैं। पैसे का लालच देकर ये संगठन, सरकारी कर्मचारियों को अपने साथ मिला लेते हैं।

पिछले दिनों जम्मू कश्मीर के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक आदेश जारी कर चार सरकारी कर्मियों को बर्खास्त कर दिया था। इनमें दो पुलिस कर्मी भी शामिल थे। बाकी दो कर्मियों में से एक स्कूल टीचर और दूसरा, जल शक्ति विभाग का सहायक लाइनमैन शामिल था। इन पर आतंकियों की मदद करने का आरोप लगा था। गत वर्ष भी जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने संविधान की धारा 311 (2) (सी) के तहत चार सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया था। उनमें एक प्रयोगशाला सहायक अब्दुल सलाम राठेर, एसएमएचएस अस्पताल में मेडिसिन का सहायक प्रोफेसर निसार-उल-हसन, पुलिस कांस्टेबल अब्दुल मजीद भट और शिक्षक फारुख अहमद मीर शामिल था।

इन सभी पर आरोप था कि ये पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों की मदद कर रहे थे। दहशतगर्दों की विचारधारा का प्रचार करने के अलावा उन्हें विभिन्न चैनल के माध्यम से धन एकत्रित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। साल 2022 के दौरान जम्मू कश्मीर में जिन पांच सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था, उन पर आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए प्रतिबंधित संगठनों की सहायता करने का आरोप लगा था। वे कर्मचारी, नार्को-टेरर सिंडिकेट से भी जुड़े थे। सूत्रों का कहना है कि सरकारी विभागों के लिए अलावा खुफिया दस्ता, पूर्व के अलगाववादी संगठनों पर भी कड़ी नजर रखेगा। आतंकियों के पास मौजूद हथियारों की मरम्मत करने वाले भी अब नहीं बच सकेंगे। जम्मू कश्मीर में जिन विभागों की सूची तैयार की गई है, उनमें पुलिस और निजी संस्थाओं के आर्मर भी शामिल हैं। निजी गन हाउस के कर्मियों पर नियमित निगरानी रहेगी।

इस बात का रखा जाएगा ध्यान

सामान्य प्रशासन यह ध्यान रखेगा कि किसी कर्मचारी का ट्रांसफर फलां जगह पर क्यों किया जा रहा है। अगर उसने ऐसी च्वाइस दी है, तो उसकी कुंडली खंगाली जाएगी। हाल ही में हुए चार आतंकी हमलों के बाद उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा था, आतंकियों के 'इकोसिस्टम' का पूरी तरह से सफाया किया जाए। दहशतगर्दों की मदद करने और उन्हें बढ़ावा देने वाले लोगों के साथ सख्ती से निपटा जाए।
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जम्मू कश्मीर के पुलिस प्रमुख आरआर स्वैन ने कहा है, आतंकवादी सब कुछ छोड़ चुके होते हैं। वे जिस राह पर हैं, वहां उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। जम्मू-कश्मीर के लोग और हितधारक, यदि आतंकवादियों की मदद करते हैं, तो उनके पास खोने के लिए सब कुछ है। ऐसे हितधारकों को चेतावनी दी जाती है कि वे राष्ट्रीय हित के खिलाफ जाएंगे तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
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