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जम्मू-कश्मीर में गृह मंत्रालय का ये मास्टर स्ट्रोक बनवा सकता है भाजपा सरकार

Wed, 05 Jun 2019 07:13 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा (फाइल फोटो)
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जम्मू-कश्मीर को लेकर नॉर्थ ब्लॉक में तेजी से स्थितियां बदल रही हैं। भले ही गृह मंत्रालय के अधिकारी खुलकर कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं, लेकिन यह तय है कि मंत्रालय में बहुत जल्द परिसीमन का मास्टर स्ट्रोक लगेगा। अगर ये मास्टर स्ट्रोक लगा तो आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार भाजपा अपने दम पर सरकार बना सकती है। गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर की भाजपा इकाई ने राज्यपाल के मार्फत गृह मंत्रालय को परिसीमन का एक कच्चा ड्राफ्ट, जिसे सुझाव पत्र भी कह सकते हैं, भिजवा दिया है। इस बाबत जल्द ही भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे।

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बता दें कि अमित शाह जिस दिन गृह मंत्री बने, उसी दिन उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ बैठक की थी। हालांकि इन दोनों नेताओं की बैठक के कोई खास इनपुट बाहर नहीं आए, लेकिन फाइलों का जो आदान-प्रदान हुआ, उससे परिसीमन का मुद्दा सामने आ गया। सूत्र बताते हैं कि परिसीमन को लेकर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकारों से भी एक रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही इस बाबत चुनाव आयोग से भी राय ली जा रही है। जेएंडके के भाजपा नेताओं की रिपोर्ट में वहां पर जल्द से जल्द परिसीमन कराने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के अलावा भाजपा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता यह बात सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि राज्य में परिसीमन अब समय की मांग है। अगर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में परिसीमन होता है तो जम्मू-कश्मीर के अलावा लद्दाख क्षेत्र के साथ भी न्याय हो सकेगा।

भाजपा इकाई ने अपनी रिपोर्ट में दिया है यह सुझाव...
भाजपा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की 111 सीटें हैं। मौजूदा स्थितियों में केवल 87 सीटों पर चुनाव लड़ा जाता है। वहां के संविधान के सेक्शन-47 के अनुसार, 24 सीटों पर चुनाव नहीं होता है। ये सीटें खाली रहती हैं। यहां बता दें कि जब जम्मू-कश्मीर का संविधान बना तो 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ी गई थी। अब भाजपा की जेएंडके इकाई ने परिसीमन को लेकर जो रिपोर्ट दी है, उसमें इन्हीं 24 सीटों का जिक्र किया गया है।पार्टी नेता चाहते हैं कि ये सीटें जम्मू क्षेत्र में जोड़ दी जाएं। अगर यह हो गया तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।सर्वविदित है कि जम्मू क्षेत्र में भाजपा लीड लेती रही है। रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि जम्मू-कश्मीर में 1995 के बाद से कोई परिसीमन नहीं हुआ है। राज्य का संविधान कहता है कि हर 10 साल में परिसीमन हो। इस बाबत तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने 2002 में यह नियम बना दिया था कि जेएंडके में 2026 तक परिसीमन नहीं होगा। चूंकि उस वक्त राज्य में भाजपा की स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए फारुक अब्दुल्ला की इस कार्रवाई का विरोध नहीं हो सका।
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राजनीतिक दलों में परिसीमन को लेकर मची है जबरदस्त खलबली ...

भले ही मंत्रालय की ओर से अधिकारिक तौर पर परिसीमन को लेकर कुछ न कहा जा रहा हो, लेकिन इससे राजनीतिक दलों में जबरदस्त खलबली मची है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने परिसीमन का विरोध करना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों को फिर से तैयार करने की भारत सरकार की योजना के बारे में सुनकर परेशान हूं, बेवजह का परिसीमन राज्य के एक और भावनात्मक विभाजन को सांप्रदायिक आधार पर भड़काने का एक स्पष्ट प्रयास है। भारत सरकार पुराने घावों को भरने की अनुमति देने के बजाय कश्मीरियों का दर्द बढ़ा रही है। सूत्रों का कहना है कि महबूबा मुफ्ती जल्द ही इस मसले पर फारुक अब्दुल्ला के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेंगी। अगले सप्ताह तक यह बैठक हो सकती है।कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग से राय मिलते ही केंद्रीय गृह मंत्रालय परिसीमन बाबत कोई भी बड़ा फैसला ले सकता है।

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