राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने हाल ही में देश में रोजगार के मामले पर एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके हवाले से वर्ष 2018 में देश में 45 वर्षों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी होने की बात कही गई थी। लेकिन इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर सरकार रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों में निवेश सीमा और बौद्धिक अधिकार कानून मामले में ज्यादा छूट देने की रणनीति बनाए तो इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं खुल सकती हैं।
एसोचैम और बीडीओ संस्थाओं के द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि नई सरकार को रक्षा मामले से जुड़े उद्योगों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 51 फीसदी करने की अनुमति दे देनी चाहिए। इसके साथ ही, मध्यम और लघु उद्योगों, प्राइवेट कंपनियों और विदेशी कंपनियों के साथ सह स्वामित्व वाली कंपनियों के मामले में बौद्धिक अधिकार कानून को लचीला बनाया जाना चाहिए। इससे विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही कंपनियों में भी रिसर्च एंड डेवलपमेंट के मामले में बढ़ोतरी आएगी और लंबे भविष्य में यह देश को रक्षा मामलों में बड़ी आत्मनिर्भरता प्रदान करेगा।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूरे विश्व में रक्षा उद्योग नौकरियों के मामले में बड़ा बाजार साबित हुआ है। एयरोस्पेस के मामले में अब पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा काम हो रहा है और आने वाले भविष्य में यह विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारकों में से एक होगा। ऐसी स्थिति में अगर विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर भारतीय पेशेवर काम करेंगे तो इनकी दक्षता में बेहतरी आएगी जो भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी विशेषज्ञ मिलने में सहायक साबित होंगे जो भारतीय रक्षा उद्योग की रीढ़ बन सकता है।