कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन अधिनियम पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि यह कानून न सिर्फ कानून की दृष्टि से गलत है, बल्कि नैतिक रूप से भी कमजोर है और यह संविधान की आत्मा पर हमला करता है। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार इसे ‘सुधार’ बता रही है, लेकिन यह वास्तव में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला है। उन्होंने कहा कि यह सुधार नहीं, बल्कि बदले की भावना से लाया गया कानून है, जिसे रणनीति के तहत लागू किया गया है।
सिंघवी ने भाजपा पर लगाए आरोप
साथ ही सिंघवी ने आरोप लगाया कि यह कानून धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म करने और उन्हें सरकारी नियंत्रण में लाने की कोशिश है। उन्होंने कहा, “धार्मिक आज़ादी को सरकारी प्रोटोकॉल में बदला जा रहा है। सामुदायिक अधिकारों को नौकरशाही की कलम से फिर से लिखा जा रहा है।
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कांग्रेस कानून के खिलाफ जारी रखेगी लड़ाई- सिंघवी
उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून किसी एक समुदाय का मामला नहीं है, बल्कि संविधान के मूल अधिकारों की सुरक्षा का मामला है। सिंघवी ने कहा कि आज वक्फ है, कल कोई और संस्था होगी। यह अधिनियम धार्मिक स्वतंत्रता की आत्मा को मारता है। साथ ही अंत में सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस कानून के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और इसे अदालत में चुनौती देती रहेगी। उन्होंने दोहराया कि यह देश के भविष्य और संविधान की रक्षा की लड़ाई है, जिसे कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में नए कानून पर सुनवाई
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ से केंद्र की मांग पर सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया।
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इसके साथ ही सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक 'उपयोगकर्ता की ओर से वक्फ' या 'दस्तावेजों की ओर से वक्फ' संपत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी वक्फ संपत्ति का पंजीकरण 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को 5 मई को अगली सुनवाई तक गैर-अधिसूचित नहीं किया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली तारीख 5 मई तय की।