आदित्य एल-1 की परियोजना निदेशक निगार शाजी
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चंद्रयान-3 की सफलता के कुछ दिन बाद भारत ने शनिवार को अपने पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल-1’ को प्रक्षेपित किया। प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के रॉकेट पीएसएलवी से किया गया। सूर्य के अध्ययन के लिए ‘आदित्य एल-1’ को धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर ‘लैग्रेंजियन-1’ बिंदु तक पहुंचने में 125 दिन लगेंगे। आदित्य एल-1 की परियोजना निदेशक निगार शाजी ने अपने इसरो के साथी वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक सपने के सच होने जैसा है।
125 दिनों की लंबी यात्रा शुरू
निगार शाजी ने कहा कि यह एक सपने के सच होने जैसा है। मुझे बेहद खुशी है कि आदित्य एल-1 को पीएसएलवी द्वारा इंजेक्ट किया गया है। आदित्य एल-1 ने अपनी 125 दिनों की लंबी यात्रा शुरू कर दी है। एक बार जब आदित्य एल-1 कमिशन हो जाएगा, तो यह देश और वैश्विक वैज्ञानिक बिरादरी के लिए एक बड़ी कामयाबी मैं इस मिशन को संभव बनाने में उनके समर्थन और मार्गदर्शन के लिए पूरी टीम को धन्यवाद देना चाहती हूं।
आदित्य-एल1 ने बिजली पैदा करना शुरू किया
इससे पहले, शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा कि पीएसएलवी-सी57 द्वारा आदित्य-एल1 का प्रक्षेपण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यान ने उपग्रह को ठीक उसकी इच्छित कक्षा में स्थापित कर दिया है। भारत की पहली सौर वेधशाला ने सूर्य-पृथ्वी L1 बिंदु के गंतव्य के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इसरो का कहना है कि आदित्य-एल1 ने बिजली पैदा करना शुरू कर दिया है। सौर पैनल तैनात हैं। पहली अर्थबाउंड फायरिंग तीन सितंबर को लगभग 11:45 बजे निर्धारित है। इस दौरान मिशन अगली कक्षा में प्रवेश करेगा।
इसरो अध्यक्ष ने भी दी बधाई
वहीं, आदित्य एल-1 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा कि आदित्य एल1 अंतरिक्ष यान को इच्छित कक्षा में स्थापित किया गया है। मैं आदित्य एल1 को सही कक्षा में स्थापित करने के लिए पीएसएलवी को बधाई देना चाहता हूं। गौरतलब है, चंद्रयान-3 की सफलता के कुछ दिन बाद भारत ने शनिवार को अपने पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल-1’ को प्रक्षेपित किया है।