केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 के द्वारा जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापिस ले लिया है। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। विधेयक के अनुसार जम्मू-कश्मीर की अपनी विधानसभा होगी पर लद्दाख के पास विधानसभा नहीं होगी।
केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर का भूगोल:
- नए जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में केवल जम्मू और कश्मीर का भू-भाग होगा, अब इसमें लद्दाख नहीं आएगा।
- कानून व्यवस्था अब केंद्र के अधीन होगी।
- अब केंद्र को अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल लगाने का हक मिल गया है।
राज्यपाल की जगह उप-राज्यपाल: जम्मू-कश्मीर के वर्तमान राज्यपाल, अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख के उप-राज्यपाल होंगे।
पुडुचेरी की तरह काम करेगा जम्मू-कश्मीर: अब अनुच्छेद 239A के सभी प्रावधान जो पुडुचेरी पर लागू होते है, वो अब जम्मू-कश्मीर पर भी लागू होंगे।
विधानसभा की अवधि: अब नई विधानसभा की अवधि पांच वर्ष होगी।
विधानसभा: नई विधानसभा में 107 विधायक होंगे, 107 में से 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए रखी जाएंगी।
वर्तमान विधानसभा: वर्तमान विधानसभा में 111 विधायक थे, जिसमें से 87 निर्वाचित, दो नामित और 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए रखी जाती थी।
नामित सदस्य: नए कानून के अनुसार, उपराज्यपाल को अगर लगे कि विधानसभा में महिलाओं की संख्या कम है तो वह दो महिलाओं को विधानसभा के लिए नामित कर सकते हैं।
राज्यसभा सीटें: राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर के चार वर्तमान सांसद बने रहेंगे।
लोकसभा सीटें: अब लोकसभा में जम्मू-कश्मीर की पांच और लद्दाख की एक सीट होगी।
उपराज्यपाल: अब विधानसभा में बिल पास होने के बाद सहमति के लिए उपराज्यपाल के पास भेजा जाएगा, उपराज्यपाल के पास बिल को अनुमति देने, रोकने और विचार के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने के विकल्प होंगे।
संसद होगी प्रधान: नए कानून के हिसाब से अगर कोई असमानता नजर आती है, तो विधानसभा द्वारा पास किए गए किसी भी कानून के ऊपर संसद के कानून की प्रधानता मानी जाएगी।
मंत्री परिषद:
- मुख्यमंत्री विधानसभा के 10 प्रतिशत से ज्यादा बड़ा मंत्री परिषद नहीं रख सकता।
- जम्मू कश्मीर को संविधान की पहली अनुसूची में राज्य सूची के 15 स्थान से हटा दिया जाएगा।
- अब इसे संविधान की पहली अनुसूची के केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में 8 स्थान पर रखा जाएगा।
सीमा-निर्धारण: केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सीमा निर्धारण के लिए प्रस्ताव रखा है।
परिसीमन:
- सरकार ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के परिसीमन का प्रस्ताव रखा है।
- सरकार ने 107 से बढ़ा कर 114 सीटें करने का प्रस्ताव रखा है।
- परिसीमन 2011 के जनगणना के आधार पर किया जाएगा।
उच्च न्यायालय: जम्मू कश्मीर और लद्दाख का एक ही हाई कोर्ट रहेगा।