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मिसाल: जिंदगी की रफ्तार पर न लगे ब्रेक...इसलिए पेंशन के पैसों से सड़कों के गड्ढे भर रहा बुजुर्ग दंपती

Mon, 19 Jul 2021 12:54 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद

सार

हैदराबाद के रहने वाले गंगाधर तिलक और वेंकटेश्वरी कटनम नामक बुजुर्ग दंपती ने अब तक सड़कों पर पिछले 11 साल में 2030 गड्ढों को भरा है, जिसके लिए वे अब तक 40 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। इस काम के लिए वे अपने पेंशन के पैसों का उपयोग करते हैं।
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हैदराबाद में गंगाधर तिलक कटनम और उनकी पत्नी वेंकटेश्वरी कटनम 11 साल से सड़कों के गड्ढे भरने का काम कर रही हैं। - फोटो : ANI
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विस्तार
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त्याग और संघर्ष के बल पर समाज सेवा करने के अनेकों उदाहरण मौजूद हैं लेकिन तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक बुजुर्ग दंपती ने समाज सेवा की एक ऐसी अनूठी मिसाल कायम की है कि लोग इस दंपती पर फक्र कर रहे हैं। इस दंपती की समाज सेवा से तेलंगाना प्रशासन व हैदराबाद नगर निगम को एक तरह का झटका भी लगा है। दरअसल, हैदराबाद में रहने वाले गंगाधर तिलक कटनम और उनकी पत्नी वेंकटेश्वरी कटनम  पिछले 11 साल से अपनी पेंशन के रुपयों से सड़क के गड्ढों को अपने हाथों से भर रहे हैं। दंपती के अनुसार अब तक वे शहरभर में 2000 गड्ढे भर चुके हैं।

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रोड डॉक्टर के नाम से बुलाते हैं लोग
73 वर्षीय हैदराबाद के गंगाधर तिलक कटनम को “रोड डॉक्टर” के नाम से भी जाना जाता है। उनके पास एक कार है, जिसे वे ‘पॉटहोल एंबुलेंस’ कहते हैं। वह अपनी पत्नी के साथ सड़क पर निकलते हैं और जहां भी उन्हें कोई गड्ढा मिलता है, उसे भर देते हैं। गंगाधर ने यह बीड़ा तब उठाया जब उनकी शिकायतों का कोई असर अधिकारियों पर नहीं पड़ा। उन्होंने देख कि गड्ढों के कारण रोजाना सड़क दुर्घटना बढ़ रही थी, ऐसे में वे खुद ही अपनी पत्नी के साथ उन गड्ढों को भरने का काम करने लगे।

सड़क के गड्ढों को भरने के लिए छोड़ दी नौकरी
बता दें, तिलक 35 वर्षों तक भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे। रिटायर होने के बाद वे एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करने के लिए हैदराबाद आए थे। बाद में सड़क के गड्ढों को भरने के लिए तिलक ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी भी छोड़ दी। गंगाधर के अनुसार इस काम के लिए जरूरी रुपयों का बंदोबस्त वे अपनी पेंशन से करते हैं।
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11 साल में भरे करूब 2 हजार गड्ढे
उन्होंने कहा, 'मैने पिछले 11 वर्षों में अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस शहर में लगभग 2,030 गड्ढों को भरा है, जिसपर लगभग 40 लाख रुपये खर्च हुए हैं।' फिलहाल गंगाधर के काम को देखते हुए सरकारी अधिकारियों ने उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर उनकी मदद के लिए आगे कदम बढ़ाया है। गंगाधर ने खुलासा किया कि वह इस काम के लिए ‘श्रमधन’ नामक एक संस्था भी चलाते हैं, जहां लोग स्वेच्छा से दान कर सकते हैं।

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