रुपये के कमजोर पड़ने का असर इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भी पड़ा है। हालांकि सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की वजह से स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट टेलीविजन तक का निर्माण भारत में होने लगा है, लेकिन अभी भी इसके अधिकतर कल-पुर्जे विदेश से ही आ रहे हैं।
टेलीविजन के पैनल की बात करें या प्रिंटेड सर्किट बोर्ड की, सब विदेश से ही आ रहे हैं। पैनासोनिक अप्लायंस इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हिदेनोरी आसो का कहना है कि सिर्फ टेलीविजन में ही देखें तो इसके साजो-सामान की कीमत में अभी 15 से 18 फीसदी का इजाफा हो चुका है।
दिल्ली की कंपनी सृष्टि फैशन के निदेशक मनोज राय का कहना है कि यूं तो उनका अधिकतर काम रेशम के कपड़ों का है लेकिन शिफॉन, जॉर्जेट आदि में भी वह काम करते हैं। पिछले दिनों कच्चा तेल के महंगा होने से कृत्रिम धागों से बने कपड़े की कीमत में 5-10 फीसदी का असर हुआ है। चूंकि इन चीजों पर बहुत कम मार्जिन पर काम होता है, इसलिए बढ़ी लागत पर कीमत बढ़ाना मजबूरी है।
उषा तथा महाराजा व्हाइटलाइन जैसी घरेलू सामान बनाने वाली कंपनी में सीईओ रहे सुनील वाधवा का कहना है कि इस समय रुपये के कमजोर होने का तो असर दिख ही रहा है, डीजल की कीमत में बढ़ोतरी होने का असर भी यह उद्योग झेल रहा है। उनके मुताबिक इस समय पंखा, मिक्सी, गीजर जैसे उपकरणों के करीब 90 फीसदी उपकरण यहां ही बनते हैं। हालांकि उसके लिए कुछ कच्चा माल आयात करना होता है। कुल मिला कर रुपये के कमजोर पड़ने से 4-5 फीसदी का असर देखने को मिलेगा, जबकि डीजल के महंगा होने से ढुलाई खर्च बढ़ने का असर 1-1.5 फीसदी तक पड़ रहा है।