देश की राजधानी दिल्ली के एक थिंक टैंक ने कहा है कि दलाई लामा की संस्था नष्ट करने में चीन विफल रहा है। थिंक टैंक लॉ एंड सोसायटी अलायंस की ओर से आयोजित एक वेबिनार में विशेषज्ञों ने तिब्बत को लेकर चिंता जताते हुए कहा, चीन लगातार दलाई लामा की संस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
करीब एक दशक से 14वें दलाई लामा ने अपनी राजनीतिक भूमिका त्याग दी है और धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन अब राजनीतिक भूमिका निभा रहा है।
जेनेवा स्थित तिब्बत ब्यूरो में मानवाधिकार के लिए विशेष रूप से नियुक्त किए गए थिनले चुक्की ने कहा, नए अवतार वाला चीन अब तिब्बत को अपना हिस्सा बनाना चाहता है, जो असल में 1950 के दशक के उसके विस्तारवादी एजेंडे का ही हिस्सा है। उस वक्त से चीन लगातार दलाई लामा की संस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
वेबिनार में वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत की अंतरिम वाइस प्रेसीडेंट टेंचो ग्यास्तो ने कहा, तिब्बती लोगों और दलाई लामा के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं। दलाई लामा संस्था को 16वीं सदी में स्थापित किया गया था और 17वीं सदी में पांचवें दलाई लामा के समय राजनीतिक अधिकार भी मिल गए। उन्होंने कहा, चीन लगातार दलाई लामा की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहा है और उनके खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ रहा है। वह तिब्बत का झूठा इतिहास गढ़ रहा है।