विदेश सचिव एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले ने भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों के केंद्र में एक बार फिर आतंकवाद के मसले ला दिया है। जब तक पाकिस्तान इस मसले का प्रभावी रूप से समाधान नहीं करता तब तक भारत के लिए रिश्ते को सामान्य बनाने में मुश्किल आएगी।
पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा कि जब तक हम आतंकवाद के मसले का प्रभावी रूप से समाधान नहीं कर लेते तब तक स्वाभाविक रूप से हमारे लिए यह कहना मुश्किल होगा कि रिश्ते सामान्य हैं। इसी कारण हमारे अन्य पड़ोसी देशों से अलग पाकिस्तान हमारे लिए दूसरी श्रेणी में आ जाता है।
हालांकि पाकिस्तान के साथ रिश्तों में चुनौती को देखते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के केंद्रीय मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रखा है। उन्होंने कहा कि अगर आप मेल-मिलापों को देखें तो पता चलता है कि एक बदलाव आया है। वह है बातचीत के केंद्र में आतंकवाद के समाधान के मुद्दे को लाना।
यह चीज दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की रूस के ऊफा में हुई मुलाकात में भी दिखी थी और बैंकॉक में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत में भी यह मुद्दा रेखांकित हुआ था। उन्होंने कहा कि समग्र द्विपक्षीय वार्ता में भी आतंकवाद के मुद्दे पर फोकस की बात है।
चीन के साथ मसूद मामले को उठाया गया
विदेश सचिव ने कहा कि आतंकवादी मसूद अजहर के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की भारत की कोशिश में चीन के अड़ंगा लगाने के मसले को पड़ोसी देश के साथ उच्च स्तर पर उठाया गया है।
पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र से भारत ने मसूद को प्रतिबंधित कराने की गुहार लगाई थी लेकिन चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत की इस कोशिश को नाकाम कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हमने चीन के साथ उच्च स्तर पर उठाया है और चीन के साथ इस मुद्दे पर बातचीत जारी रहेगी।