गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट पर रविवार को मतदान कराए जा रहे हैं। आमतौर पर बहुत कम उपचुनाव इतने ज्यादा दिलचस्पी भरे होते हैं।
पिछले बुधवार को अपने प्रत्याशी के लिए वोट मांगने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समर्थकों के सामने हवा में हाथ लहराते हुए कहा था, "इसे मामूली चुनाव मत समझो। बीजेपी यह चुनाव न होने देने के लिए हर तरह की टालमटोल कर रही थी। अब मौका मिला है तो इसे जीतने का काम करो।"
खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार अपनी सभाओं में तकरीबन यही बात कह रहे हैं और इसे अहम चुनाव बताते हुए समर्थकों और वोटरों को बड़ी संख्या में मतदान करने को कह रहे हैं।
क्यों अहम हैं ये उपचुनाव?
आखिरकार यह उपचुनाव इतने अहम क्यों बन गए हैं और इसके नतीजे किन बातों पर अपना असर छोड़ेंगे, आइए इन 11 बातों से इसे समझने की कोशिश करते हैं।
1- हर चुनाव की तरह यह चुनाव भी किसी की हार और किसी की जीत तय करेंगे। दोनों ही सीटों पर मुख्य मुकाबले में वही दल है जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में पंजे भिड़ाए थे। इन सीटों पर जीत दोनों के लिए बहुत मायने रखती है।
2- इस चुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए शायद सबसे ज्यादा अहम हैं। यदि अपनी अगुवाई में वे जीत दिलाते हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में उनके कद में जबरदस्त इजाफा होगा। देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री बनने के बाद वैसे भी पार्टी ने उन्हें गुजरात, त्रिपुरा और कर्नाटक जैसे दूरवर्ती क्षेत्रों में भी स्टार प्रचारक के बतौर भेजा है। उपचुनाव की जीत उन्हें और ताकतवर नेता का दर्जा देगी और राष्ट्रीय स्तर पर खासतौर पर 2019 की चुनावी रणनीति में मोदी और शाह के बाद शायद पार्टी के वे सबसे चमकीले चेहरे के तौर पर पहचाने जाएंगे।
3- प्रदेश भाजपा की राजनीति में भी इन चुनाव के नतीजे एक महत्वपूर्ण असर डालेंगे। पिछले कुछ समय से रह रह कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच तनातनी की खबरें आती रही है। संयोग से यह दोनों उपचुनाव इन्हीं दोनों व्यक्तियों द्वारा खाली की गई सीटों पर हो रहे हैं। दोनों पर अपनी अपनी सीटों को जिताने का जिम्मा और दबाव है। जाहिर है कि किसी एक सीट पर आया खराब परिणाम उस व्यक्ति की आकांक्षाओं और प्रगति के आगे एक लक्ष्मण रेखा खींच देगा।