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इन महिला राजनीतिज्ञों ने कायम किया है भारतीय राजनीति में वर्चस्व

Tue, 18 Sep 2018 07:46 PM IST
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में ही नहीं पूरे विश्व में राजनीति में महिलाओं के जुड़ने से एक नया पहलू उभर कर सामने आ रहा है। राजनीति में अब महिलाओं की अधिक प्रतिभागिता देखने को मिल रही है। पारंपरिक राजनीति में पुरुषों के वर्चस्व के बावजूद कुछ महिला राजनीतिज्ञ ऐसी हैं जिन्होंने तमाम कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय राजनीति में अपनी धाक जमाई है। इन्होंने न सिर्फ अपने काम से बल्कि, कुशल व्यवहार, नीति और बुद्दिमता से अलग मुकाम बनाया है। ऊंचे पद पर नियुक्त होने के साथ ही कुछ ने भारत के राज्यों में राज भी किया है।

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सुषमा स्वराज :
पेशे से वकील सुषमा स्वराज भारत की विदेश मंत्री हैं। 1977 से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाली सुषमा 6 बार संसद सदस्य और 3 बार विधान सभा सदस्य चुनी जा चुकी हैं। महज 25 वर्ष की आयु में स्वराज हरियाणा विधानसभा की सदस्य बनीं थीं।

1979 में वह हरियाणा जनता पार्टी की अध्यक्ष बनीं। अपने 41 साल के राजनीतिक करियर में सुषमा स्वराज हरियाणा से श्रम एवं रोजगार कैबिनेट मंत्री, थोड़ी अवधि के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री, केंद्रीय कैबिनेट में सूचना एवं जनसंचार मंत्री, केंद्रीय कैबिनेट में दूरसंचार मंत्री व गृह मंत्रालय की स्टैंडिंग समिति की अध्यक्ष रह चुकी हैं। 
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निर्मला सीतारमण
रक्षामंत्री के पद पर नियुक्त निर्मला सीतारमण पेशे से एक इकोनॉमिस्ट और सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं। वह 2008 से भाजपा से जुड़ी हैं। 2010 से 2014 तक निर्मला भाजपा की प्रवक्ता भी रहीं। अपने राजनीतिक करियर में वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री, कॉर्पोरेट मंत्रालय में राज्य मंत्री, वारिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री भी रहीं।

ममता बनर्जी 
2011 से अब तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 में कांग्रेस पार्टी से की थी। 1997 में कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद स्वयं की एक नयी पार्टी बनाई 'तृणमूल कांग्रेस', इसके साथ ही उन्होंने दो बार देश के रेल मंत्री का पद भी संभाला। 

मायावती 
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती चार बार देश के सबसे बड़े राजनीतिक राज्य यानि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में की थी। उत्तर प्रदेश में इन्होंने कई बार कई राजनीतिक धुरंधरों को पटखनी दी है। 

वसुंधरा राजे 
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ग्वालियर के राजघराने से तालुक रखती हैं..राजे 1984 में वह भाजपा की कार्यकारिणी में शामिल हुईं। राजे भाजपा युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष भी रही हैं। 1985 में वह विधायक बनीं। वसुंधरा राजे झालरपाटन विधानसभा से तीन बार विधायक रहीं। राजस्थान में मुख्यमंत्री के तौर पर यह उनका दूसरा कार्यकाल है। 
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