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वो परिंदे जो एक ही उड़ान में तय करते हैं मीलों का सफर

Sun, 24 Jul 2016 12:59 PM IST
एला डेविस/ बीबीसी
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- फोटो : BBC
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आपने सफर तो खूब किया होगा। रेलवे से, हवाई जहाज से, कार से, बस से, मेट्रो से, बाइक से। और, कभी-कभार पैदल भी। साइंस की तरक्की के साथ इंसान दूरी तय करने के नए-नए तरीके अपने लिए बनाता गया। इसलिए हजारों किलोमीटर की दूरी नापना, चुटकियों की बात हो गई। मगर, दुनिया में ऐसे जानवर भी हैं जो बिना किसी साधन के हजारों-हजार किलोमीटर का सफर तय करते हैं। चलिए आज आपको लंबा सफर करने वाले ऐसे ही जानवरों से मिलाते हैं।
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ये जमीन पर भी मिलते हैं। समंदर में भी और हवाई सफर पर भी निकलते हैं। मगर मुश्किल ये है कि सबसे लंबा सफर तय करने वाले जानवर का नाम बताना आसान नहीं। इसकी दो वजहें हैं। पहली तो ये कई जानवर टुकडों में अपना सफर तय करते हैं। कुछ होते हैं जो एक बार में पंद्रह सौ मील चल लेते हैं।

वहीं कुछ दो टुकडों में दो हजार मील की दूरी तय करते हैं। ऐसे में किसके सफर को लंबा माना जाए। दूसरी बात ये कि जमीन पर दूरी तय करना, हवा या पानी में सफर करने के मुकाबले ज्यादा मुश्किल होता है। पानी में जानवरों को लहरों का साथ मिल जाता है।
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वहीं आसमान में उडते वक्त हवा का। जमीन पर चलने वाले जानवर अपने बूते ही सफर तय करते हैं। तो सबसे लंबी दूरी तय करने वाला जानवर कौन है, ये तय करना अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग हो सकता है। तो चलिए, आपको लंबी दूरी तय करने वाले जानवरों से मिलाते हैं। शुरुआत समंदर से।

लंबा सफर करने के मामले में व्हेलें हैं काफी आगे

- फोटो : BBC
लंबा सफर करने के मामले में व्हेलें काफी आगे हैं। पहले माना जाता था कि ग्रे व्हेल सबसे दूर तक जाती है। मगर 2007 में हम्पबैक व्हेल ने ये खिताब छीन लिया। इनका पीछा करने से पता चला कि कुछ हम्पबैक व्हेलें अंटार्कटिका से कोस्टारिका तक आती हैं। ये दूरी 5160 मील या 8299 किलोमीटर है। मगर, ग्रेट व्हाइट शार्क तो इनसे भी आगे हैं।

निकोल नाम की एक शार्क दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक गई थी। ये दूरी 11 हजार किलोमीटर है। नौ महीनों के भीतर निकोल ने ये सफर दोबारा तय किया था, घर वापसी के लिए। अमरीकी वैज्ञानिकों ने एक मादा लेदरबैक कछुए का पीछा किया था। इसने प्रशांत महासागर में इंडोनेशिया से अमरीका तक का सफर किया था, जो 20 हजार पांच सौ किलोमीटर है।

समंदर में बहुत से जानवर हैं जो मौसम के हिसाब से यहां-वहां आते जाते हैं। अक्सर वो ये सफर रात के वक्त करते हैं, जब खतरा कम होता है। हालांकि इनका पीछा करना आसान नहीं। अब बात जमीन पर सफर करने वाले जानवरों की। पूर्वी अफ्रीका में पाए जाने वाले जंगली भैंसे सूखे और बारिश के मौसम के हिसाब से करीब तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। हर साल हजारों की तादाद में ये भैंसे चारे-पानी की तलाश में ये दूरी तय करते हैं।

लंबे सफर के लिए आसमान का रास्ता सबसे अच्छा है

- फोटो : BBC
इसी तरह उत्तरी अमरीका में पाये जाने वाले हिरण, कैरिबू का सफर तो और भी लंबा है। ये जानवर दाना-पानी खोजते हुए करीब 4800 किलोमीटर दूर तक का सफर कर डालते हैं। शायद ये और भी लंबी दूरी तक जाएं। मगर जहां जमीन खत्म हो जाती है और समंदर शुरू हो जाता है, वहां से इनका सफर भी खत्म हो जाता है।

इससे भी लंबे सफर के लिए आसमान का रास्ता सबसे अच्छा है। अमरीका में पाई जाने वाली मोनार्क तितलियों को ही लीजिए। ये मेक्सिको से कनाडा तक उडते हुए जाती हैं। ये दूरी ढाई हजार मील या करीब चार हजार किलोमीटर बैठती है। इसी तरह अफ्रीका में पाई जाने वाली लेडी बटरफ्लाई, उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तान से आर्कटिक तक का सफर तय करती है। ये दूरी 15 हजार किलोमीटर होती है।

भारत में पाया जाने वाले ड्रैगनफ्लाई नाम के पतंगे यहां से अफ्रीका तक जाते हैं और फिर वापस आते हैं। ये सफर 18 हजार किलोमीटर लंबा होता है। मगर, तितलियों और पतंगों के इस सफर को असली सफर मानना ठीक नहीं। क्योंकि इनकी उम्र ही कुछ दिनों या हफ्तों की होती है। ऐसे में इतना लंबा सफर कोई एक तितली या पतंगा नहीं करता। इसमें कई पीढिया लग जाती हैं।

दुनिया का सबसे छोटा पंछी, हमिंगबर्ड भी करीब 2200 किलोमीटर उडान भरता है

- फोटो : BBC
लंबी दूरी के सफर के मामले में परिंदों का कोई मुकाबला नहीं। दुनिया का सबसे छोटा पंछी, हमिंगबर्ड भी करीब 1400 मील या 2200 किलोमीटर उडान भरता है। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि हमिंगबर्ड एक सिक्के से भी कम हल्की होती है। इसका वजन पांच ग्राम से भी कम होता है।

लंबी दूरी तय करने के मामले में समुद्री परिंदे वांडरिंग अल्बाट्रॉस का नाम पहली पायदान पर रखा जाता है। ये उडने वाला धरती का सबसे बडा जीव है। एक बार में ये करीब नौ हजार मील या 15, 500 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर लेते हैं। इनके लंबी वक्त तक उडने का सबसे बडा राज है इनका उडने का तरीका। ये पक्षी उडते वक्त अपने पंख ज्यादा नहीं फडफडाते। हवा के रुख के साथ उडने की वजह से इन्हें जल्दी थकान नहीं होती।

एक और परिंदा है जो अपने पंखों की मदद से लंबी दूरी तय करता है। इसका नाम है बार टेल्ड गॉडविट। अमरीकी वैज्ञानिकों ने इसका पीछा किया तो पाया कि ये पंछी न्यूजीलैंड से अलास्का तक का सफर तीन टुकडों में तय करते हैं। ये दूरी 30 हजार किलोमीटर है। जो ये परिंदे बीस दिन में तय करते हैं। न्यूजीलैंड या ऑस्ट्रेलिया से उडकर ये एशिया तक आते हैं। यहां से उडकर ये अमरीका के अलास्का प्रांत तक जाते हैं।

आर्कटिक से पक्षी यूरोप आते हैं फिर ये अंडे देने के लिए निकल जाते हैं अंटार्कटिका

- फोटो : BBC
अलास्का से घर वापसी का सफर ये बिना रुके करते हैं। ये दूरी भी करीब 11 हजार 800 किलोमीटर बैठती है। खाने और अंडे देने के लिए परिंदे सुरक्षित जगह तलाशते हुए लंबा सफर कर डालते हैं। ऐसा ही एक समुद्री पक्षी होता है सूटी शियरवाटर। ये पक्षी साल भर में खाने और प्रजनन के लिए करीब 64 हजार 300 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। न्यूजीलैंड से अलास्का के बीच।

2011 में वैज्ञानिकों ने आर्कटिक में पाए जाने वाले समुद्री पक्षी टर्न के बारे में रिसर्च की। ये समुद्री परिंदे साल भर में करीब 30 हजार मील या 48 हजार 700 किलोमीटर दूरी तय करते हैं। आर्कटिक से ये पक्षी यूरोप आते हैं। फिर ये अंडे देने के लिए यूरोप से भी आगे निकल जाते हैं, अंटार्कटिका की ओर। इनकी तय की हुई कुल दूरी करीब 90 हजार किलोमीटर होती है।
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बीच बीच में ये रुककर सफर की थकान उतारते हैं

- फोटो : BBC
ब्रिटिश वैज्ञानिक रिचर्ड फिलिप्स कहते हैं कि इन परिंदों को रहने खाने के लिए जिन चीजों की जरूरत होती है, उसी की तलाश में ये लंबा सफर करते हैं। बीच बीच में ये रुककर सफर की थकान उतारते हैं। खा-पीकर शरीर को मजबूत करते हैं। और फिर सफर पर निकल पडते हैं। वैसे आर्कटिक में पाए जाने वाले ये समुद्री पक्षी, सारे के सारे ऐसे नहीं होते कि इतना लंबा सफर करें। कुछ आस-पास की दूरी में ही सिमटकर रहते हैं।

अभी हाल के रिसर्च के बाद इन परिंदों के लंबे सफर का रिकॉर्ड भी टूट गया। एक आर्टकिट टर्न का पीछा करने पर पता चला कि ये ब्रिटेन के फार्न आइलैंड्स से अंटार्कटिका तक गया और फिर वापस आया। ये सफर 59 हजार 600 मील या 96 हजार किलोमीटर लंबा था। यानी आर्कटिक टर्न ने अपने ही भाई-बिरादर का रिकॉर्ड तोड डाला। भीड से बचने के लिए ये परिंदा कुछ ज्यादा दूर नहीं निकल गया!
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