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दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान, कंपा देते हैं दुश्मन की रूह

Thu, 30 Jul 2020 09:24 PM IST
मुकेश कुमार झा शशिधर पाठक, नई दिल्ली

सार

  • एफ-35 लाइटनिंग-2, एफ-22 रॉप्टर (अमेरिका)
  • सुखोई, सू-57 से अभी उठना बाकी है पर्दा (रूस)
  • चेंगदू जे-20 (चीन)
  • यूरोफाइटर टाइफून, स्वीडिश ग्रिपेन, फ्रांस का राफेल
  • एफ-16, एफ-18 सुपर हार्नेट
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राफेल एयरक्राफ्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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हथियारों और रक्षा साजो-सामान की अपनी अलग दुनिया है। शीर्ष वैज्ञानिक जितना सृजन की तकनीक विकसित करने में लगे रहते हैं, उसके सामानांतर उतने ही भयंकर प्रलयकारी हथियारों के विकास में लगे रहते हैं। बुधवार को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर जब राफेल लड़ाकू विमानों ने लैंड किया तो लोगों के उत्साह का ठिकाना न रहा। लेकिन यह फ्रांस की वायुसेना की रीढ़ कहा जाने वाला राफेल है। दुनिया में इससे कई गुना खतरनाक फाइटरजेट अपनी रफ्तार, चपलता, खतरनाक मिशन से हैरान करने के लिए उड़ान भर रहे हैं।

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पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान : एफ-35 लाइटनिंग-2
इस्राइल लड़ाकू विमानों ने पलक झपकते ही सीरिया में बमबारी की और जब तक लोग समझ पाते उतनी देर में विमान मिशन पूरा करके लौट चुके थे। बाद में पर्दा उठा तो लोगों को मालूम हुआ कि फाइटर जेट एफ-35 का कहर था। अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन ने इस सिंगल सीटर फाइटर जेट को विकसित किया है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत फाइटर जेट की घातकता (स्टील्थ) है। विमान का टेक ऑफ बहुत छोटा रन-वे पर संभव है। इससे भी ज्यादा हैरत इसकी लैंडिंग है। यह कहीं भी हेलीकॉप्टर की तरह सीधे वर्टिकल लैंडिंग कर सकता है। यही विशेषता इसे युद्धपोतों के सबसे उपयुक्त बनाती है। दुश्मन के रेडार, सर्विलांस उपकरण, सेंसर आदि को चकमा देने में इसका कोई सानी नहीं है।
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अमेरिका ने इस एक लड़ाकू विमान की कीमत 100 मीलियन डॉलर से भी अधिक रखी है और इसे अभी तक केवल इस्राइल (50 फाइटर जेट)को दिया है। अन्य देशों को इसे देने में सतर्क और संवदनशील बना रहता है। यह फाइटर जेट पिछले पांच साल से अमेरिकी वायुसेना को अपनी सेवाएं दे रहा है।

एफ-22 रॉप्टर
इसे भी अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन ने विकसित किया है। एफ-22 रॉप्टर का ही उन्नत संस्करण एफ-35 लाइटनिंग-2 है। एफ-22 रॉप्टर अपने आप में उम्दा, बेहद खतरनाक, रेडार से ओझल होने की कला में माहिर, स्टेट ऑफ आर्ट एवियानिक्स और खतरनाक हथियारों को ले जाने में सक्षम है। अमेरिका एफ-रॉप्टर को किसी देश को देने में बेहद सावधानी बरतता है। अमेरिका ने 2005 में ही इसे अपनी वायुसेना में शामिल कर लिया था।

सोखोई, सू-57

रूस की लड़ाकू विमान निर्माता कंपनी ने सू-27 के उन्नत संस्करण के रूप में सू-57 को विकसित किया है। इस फाइटर जेट की खूबियों से अभी पूरी तरह से पर्दा उठना बाकी है। इसे इसी साल के अंत तक रूस वायुसेना बेड़े में शामिल कर सकता है। यह एक दो इंजन वाला सिंगल सीटर फाइटर जेट है।

सामरिक विशेषज्ञ बताते हैं कि यह दुनिया का सबसे घातक, सबसे खतरनाक, तेज गति से हमला करने में सक्षम फाइटर जेट हो सकता है। अभी तक एफ-35 लाइटनिंग ही ऐसा फाइटरजेट है, जिसके मिशन की टोह लेना बहुत मुश्किल है, लेकिन कहा जा रहा है कि घातकता के मामले में यह उसे कड़ी टक्कर दे सकता है।

सू-57 भी किसी रेडार, सेंसर आदि की पकड़ से दूर फाइटरजेट है। चाहे एफ-35 लाइटनिंग हों या सू-57 जैसे फाइटर जेट ये हवा में लंबी दूरी के आपरेशन को अंजाम देने में सक्षम हैं। इसमें जमीनी, हवा और समुद्र क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभालने की क्षमता है। 10,300 किग्रा ईधन की क्षमता वाले इस फाइटर जेट में मिग-29 की तरह प्रतिरक्षी, सू-27 की तरह मारक क्षमता है। इसका उपयोग बहुउद्देश्यी अभियानों में किया जा सकता है और इसे विकसित करने में भारत भी भागीदार है।

चेंग्दू जे-20
चीन ने चेंग्दू जे-20 फाइटरजेट को अपनी जनमुक्ति सेना (पीएलए) में 2017 में शामिल कर लिया है। चीन इसे पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बताता है। इस लड़ाकू विमान की कुछ खासियत इसे बहुत बेहतर बनाती हैं। यह भी सिंगल सीटर और दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है।

किसी भी मौसम में और किसी भी परिस्थति, दुरुह मिशन पर जाकर दुश्मन के ठिकाने को तबाह कर सकता है। सामरिक जानकारों के अनुसार घातकता(स्टील्थ) में यह अमेरिका और रूस के लड़ाकू विमानों से कुछ पीछे रह सकता है, लेकिन दुश्मन के रेडार को चकमा देने, डेटा ट्रांसफर, एवियानिक्स के मामले में काफी उन्नत है।

चीन के रक्षा वैज्ञानिक और सामरिक विशेषज्ञ इसे अमेरिका के एफ-22 और एफ-35 के बाद विश्व का तीसरा पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट मानते हैं। चीन इसे अपने सभी प्रमुख एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात करने पर काम कर रहा है। चीन के सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक चेंग्दू को टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए बहुत छोटे रनवे की आवश्यकता पड़ती है।
 
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चौथी पीढ़ी के बहुफद्देशीय लड़ाकू विमान : राफेल

राफेल फ्रांस की वायुसेना का बैकबोन है। यह चौथी और पांचवी पीढ़ी के बीच का लड़ाकू विमान माना जाता है। फाइटरजेट के पास अपनी खुद की रेडारप्रणाली, उच्च स्तरीय कॉकपिट, सुपर एवियानिक्स है। सभी तरह के घातक हथियारों को ले जाने में सक्षम, हवा में कलाबाजियों, युद्धक कौशल से भरपूर घातक फाइटर जेट है। यह जमीन से हवा में और हवा से जमीन पर तथा हवा से हवा में मार करने में सक्षम है।

यूरोफाइटर टाइफून
यूरोफाइटर टाइफून को यूरोपीय देशों के रक्षा वैज्ञानिकों ने मिलकर विकसित किया है। यह भी चौथी और पांचवी पीढ़ी के बीच का तथा राफेल के टक्कर का लड़ाकू विमान है। इसके पास भी लड़ाकू विमान में ही रेडार प्रणाली, उन्नत एवियानिक्स, पायलट फ्रेंडली काॉकपिट है। भारत के लिए जरूरी 126 लड़ाकू विमानों की प्रतिस्पर्धा में यूरोफाइटर टाइफून ने भी बाजी मारी थी, लेकिन रक रखाव समेत अन्य कीमतों के ज्यादा होने के कारण यह एल-2 आया था। इस प्रतिस्पर्धा में यूरोफाइटर टाइफून को परखने वाले भारतीय फाइटरजेट पायलटों, विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी तरह से यह राफेल से 19 नहीं है।
 
स्वीडिश ग्रिपेन
सिंगल सीटर, सिंगल इंजन का शानदार फाइटर जेट है। इसकी मारक क्षमता, कॉकपिट, एवियानिक्स, सेंसर प्रणाली सब उच्चकोटि की है। इसका रखरखाव काफी सस्ता है और इसकी आसानी से किसी भी सड़क से टेक ऑफ लैंडिंग कराई जा सकती है। यह हर तरह के युद्धक आपरेशन में पायलट फ्रेंडली फाइटर जेट है। कहा जाता है कि भारतीय वायुसेना को यदि सिंगल इंजन फाइटर जेट चुनना होता तो वह ग्रिपेन को वरीयता देती। इसे स्टेट ऑफ आर्ट और अपनी श्रेणी का मॉडल एयर क्राफ्ट कहा जाता है।

लॉकहीड मार्टिंन का एफ-16
अमेरिका का यह फाइटर जेट फाइटिंग फाल्कन के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान के पास भी एफ-16 है। एफ-16 अपने श्रेणी की उन्नत फाइटिंग फ्लाइंग मशीन है। हलांकि यह एकल इंजन वाला फाइटरजेट है। इराक पर बमबारी हमले करके इसने अपना कहर बरपाया था। यह एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है और किसी भी मौसम में आपरेशन को अंजाम दे सकता है। 1976 से अब तक अमेरिका की विमान निर्माता कंपनी विभिन्न देशों के करीब 5000 फाइटर जेटों का निर्माण कर चुकी होगी। भारत में एकल इंजन वाले एफ-17 फाइटर जेट के निर्माण की योजना थी, लेकिन बाद में यह रद्द हो गई।

एफ-18 सुपर हार्नेट
यह भी चौथी पीढ़ी के बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान की श्रेणी में आता है। अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने इसे विकसित कयिा है। यह चौथी और पांचवी पीढ़ी के बीच का लड़ाकू विमान है। फाइटिंग फ्लाइंग मशीन के मामले में इसका भी जवाब नहीं है, लेकिन रख-रखाव के लिहाज से मंहगा फाइटर जेट माना जाता है। यह दो इंजन वाला, सबी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। इसे त्वरित कार्रवाई वाला टैक्टिकल फाइटर जेट माना जाता है। इराक के नो फ्लाई जोन में सन 2002 में इसने अटैक करके इराकी सेना की कमर तोड़ दी थी।
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