मंत्रियों में चेहरा दिखाने की होड़
भाजपा ने यूपी सरकार के कई मंत्रियों को प्रचार में उतारा था लेकिन वे फोटो खिंचवाने, अखबार में छपवाने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने तक सीमित रह गए।
कार्यकर्ताओं की उपेक्षा भारी पड़ी
जानकारों की मानें तो भाजपा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा भी
भारी पड़ी। सरकार का कार्यकाल एक साल पूरा होने वाला है लेकिन कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिल सका। पुलिस, प्रशासनिक अफसरों से कार्यकर्ताओं ने जो भी सिफारिश की या सहूलियत मांगी, उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
आरएसएस की दूरी भी कारण
गोरखपुर सदर लोकसभा उपचुनाव में आरएसएस ने कोई खास रुचि नहीं ली। गोरक्ष प्रांत के बड़े पदाधिकारी आरएसएस के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में हिस्सा लेने नागपुर चले गए। इस कारण पदाधिकारी वोट भी नहीं डाल सके।
सांसद के खिलाफ मुकदमे का गलत सियासी संदेश
चुनाव प्रचार के बीच में ही गोरखपुर पुलिस ने बांसगांव से भाजपा सांसद कमलेश पासवान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। लिहाजा वह चुनाव प्रचार बीच में छोड़ गिरफ्तारी से बचने की कोशिश में लग गए। इसका गलत सियासी संदेश गया। ऐसा लगा कि पासवान वोट बैंक भी भाजपा से किनारे हो गया है।
संगठनात्मक रणनीति फेल
सपा के मुकाबले भाजपा की संगठनात्मक रणनीति भी फेल हो गई।