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भारी बहुमत से सरकार बनाने के बाद अब ये होंगी मोदी सरकार की बड़ी चुनौतियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Thu, 30 May 2019 04:18 PM IST
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मोदी सरकार के सामने होंगी कई चुनौती - फोटो : PTI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने जा रहे हैं। इस बार का चुनाव ऐतिहासिक रहा, जिसमें लोगों ने जाति-पाति से ऊपर विकास को चुना। देश में मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ तो आ रही है, लेकिन सरकार के सामने चुनौतियां भी अब कम नहीं हैं।

बीते लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की। ऐसे में मतदाताओं की सरकार से अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं। अब लोग सरकार से अगर वगर का कोई विकल्प नहीं सुनना चाहते। हर आयु वर्ग के देशवासी को सरकार से बहुत सी उम्मीदें हैं। यही वजह है कि सरकार के गठन से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौ दिन का एजेंडा तैयार किया है। ऐसे में सरकार की चुनौतियों को जानना भी काफी जरूरी है-

अयोध्या विवाद

सरकार के लिए निश्चित तौर पर इस बार राम मंदिर का मुद्दा अहम होगा। संघ परिवार, साधु-संत और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोग भी अब इस मामले पर इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि ये मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन सरकार के सामने ये विकल्प है कि या तो वह कोर्ट के आदेश का इंतजार कर सकती है या फिर कानून के जरिए इस मुद्दे पर कोई मार्ग निकाल सकती है। अदालत का फैसला जल्द आने की उम्मीद काफी कम है। ऐसे में अगर सहयोगी दल साथ देते हैं तो सरकार कानून के जरिए शायद कुछ कर पाए।

अनुच्छेद 35ए

जम्मू एवं कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 35ए को भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में खत्म करने का वादा किया है। सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान इस मामले ने काफी तूल भी पकड़ लिया था। बता दें इस अनुच्छेद को संसद की सहमति के बिना संविधान में जोड़ा गया था, ऐसे में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से इसे निरस्त किया जा सकता है। ऐसे में सरकार के पास दो तरह के विकल्प हैं। पहला विकल्प ये है कि सरकार इस ओर सहयोगियों से समर्थन ले और दूसरा विकल्प है कि सरकार अदालत का रास्ता अपनाए।

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मोदी सरकार के सामने होंगी कई चुनौती - फोटो : PTI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने जा रहे हैं। इस बार का चुनाव ऐतिहासिक रहा, जिसमें लोगों ने जाति-पाति से ऊपर विकास को चुना। देश में मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ तो आ रही है, लेकिन सरकार के सामने चुनौतियां भी अब कम नहीं हैं।

बीते लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की। ऐसे में मतदाताओं की सरकार से अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं। अब लोग सरकार से अगर वगर का कोई विकल्प नहीं सुनना चाहते। हर आयु वर्ग के देशवासी को सरकार से बहुत सी उम्मीदें हैं। यही वजह है कि सरकार के गठन से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौ दिन का एजेंडा तैयार किया है। ऐसे में सरकार की चुनौतियों को जानना भी काफी जरूरी है-

अयोध्या विवाद

सरकार के लिए निश्चित तौर पर इस बार राम मंदिर का मुद्दा अहम होगा। संघ परिवार, साधु-संत और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोग भी अब इस मामले पर इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि ये मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन सरकार के सामने ये विकल्प है कि या तो वह कोर्ट के आदेश का इंतजार कर सकती है या फिर कानून के जरिए इस मुद्दे पर कोई मार्ग निकाल सकती है। अदालत का फैसला जल्द आने की उम्मीद काफी कम है। ऐसे में अगर सहयोगी दल साथ देते हैं तो सरकार कानून के जरिए शायद कुछ कर पाए।

अनुच्छेद 35ए

जम्मू एवं कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 35ए को भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में खत्म करने का वादा किया है। सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान इस मामले ने काफी तूल भी पकड़ लिया था। बता दें इस अनुच्छेद को संसद की सहमति के बिना संविधान में जोड़ा गया था, ऐसे में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से इसे निरस्त किया जा सकता है। ऐसे में सरकार के पास दो तरह के विकल्प हैं। पहला विकल्प ये है कि सरकार इस ओर सहयोगियों से समर्थन ले और दूसरा विकल्प है कि सरकार अदालत का रास्ता अपनाए।

नरेंद्र मोदी-अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

रोजगार

नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद सरकार पर रोजगार को खत्म करने का आरोप लगाया गया। सबसे अधिक मध्यम वर्ग प्रभावित हुआ है। वहीं सरकार की ही एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि देश में बेरोजगारी दर 45 साल पहले से भी ज्यादा है। जाहिर तौर पर सरकार को मध्यम वर्ग ने भी वोट दिया है, तो ऐसे में सरकार को भी रोजगार के मुद्दे पर जल्द कदम उठाने होंगे।

कृषि

सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान किसानों ने कई विरोध प्रदर्शन किए। लेकिन फिर भी इस बार हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के न्याय योजना (72 हजार रुपये सालाना) की बजाय भाजपा के किसान सम्मान (6 हजार रुपये सालाना) पर भरोसा किया। 

ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों को साल 2022 तक फसल की दोगुनी लागत और सुचारु सिंचाई व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार को फसल की उचित कीमत किसानों को दिलाने के लिए कोई बड़ा कदम उठाना होगा। देश की आधी आबादी कृषि पर निर्भर है और इस क्षेत्र को सुधारे बिना सरकार का बेरोजगारी पर लगाम लगाना भी मुश्किल है।

आयकर छूट

सरकार ने अंतरिम बजट में कर छूट की सीमा को पांच लाख रुपये तो कर दिया लेकिन इसे स्लैब में नहीं डाला। जिसके चलते पांच लाख से अधिक आय वाले लोगों को पहले की तरह ही कर चुकाना होगा। लेकिन इस बार मध्यम वर्ग सरकार से उम्मीद कर रहा है कि पांच लाख रुपये की सीमा को स्लैब में शामिल किया जाए। ऐसे में जाहिर है कि सबकी निगाहें सरकार के पहले आम बजट पर हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : पीटीआई

आधारभूत संरचना

सरकार ने घोषणा पत्र में साल 2024 तक 100 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का वादा किया है। इससे पता चलता है कि सरकार ने आधारभूत संरचना के विकास से रोजगार सृजित करने की रणनीति बनाई है। इस निवेश से राजमार्गों की लंबाई में पहले से कई फीसदी की वृद्धि करने की बात कही गई है। अगर इस क्षेत्र में तेजी से काम हुआ तो रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

गांवों का विकास

चाहे गांव हों या छोटे शहर, इस बार लोगों ने भाजपा की झोली वोटों से खूब भरी है। ऐसे में इन ग्रामीण इलाकों का विकास करने की चुनौती भी सरकार के सामने है। हालांकि लोगों की अपेक्षाओं का दबाव काफी हद तक कम करने के लिए सरकार की योजना प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का सहारा लेने की है। माना जा रहा है कि सरकार कैबिनेट की पहली बैठक में ही इसके लिए बजट की घोषणा कर सकती है।

आवास क्षेत्र

भाजपा की बड़ी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका प्रधानमंत्री आवास योजना ने भी निभाई है। सरकार ने अपने घोषणा पत्र में 2022 तक सभी को पक्का मकान देने का वादा किया है। सरकार जल्द से जल्द इस लक्ष्य को पूरा रकने के लिए सौ दिन के एजेंडे के तहत रोडमैप सामने रख सकती है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भ्रष्टाचार

सरकार के पहले कार्यकाल में बैंकों के हजारों करोड़ लेकर विदेश भागे उद्योगपतियों का मामला काफी उठा। विपक्ष ने इसे अपना चुनावी मुद्दा भी बनाया। साथ ही विपक्ष ने सरकार पर राफेल घोटाले का भी आरोप लगाया। जाहिर तौर पर सरकार को अपने सौ दिन के एजेंडे में भ्रष्टाचार पर कोई बड़ा कदम उठाने की कोशिश करनी चाहिए।

शिक्षा नीति

मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में नई शिक्षा नीति नहीं ला पाई। जिसे लेकर संघ परिवार बेहद गंभीर है। माना जा रहा है कि सरकार नई शिक्षा नीति जल्द लाने की तैयारी में है।

विदेशी ताकतें

सरकार के सामने विदेशी ताकतों से संतुलन साधना भी एक बड़ी चुनौती है। एक तरफ अमेरिका और ईरान आमने सामने हैं, वहीं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध चल रहा है, इसके अलावा सऊदी अरब और ईरान के संबंध भी आपस में ठीक नहीं हैं। ऐसे में देश के हित को देखते हुए इन सभी विदेशी ताकतों से संतुलन साधना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। साथ ही सरकार संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सीट के लिए भी कोशिश करेगी।

आतंकवाद

सरकार के पहले कार्यकाल में जम्मू एवं कश्मीर में सेना के खिलाफ कई आतंकी घटनाएं हुईं। पुलवामा हमले ने भी देश की सुरक्षा पर प्रशन चिन्ह लगा दिया। ऐसे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को न्योता ना देकर सरकार ने कठोर नीति जारी रखने का संकेत दिया है। सरकार को इस बार मुस्लिम देशों में पाक की पैठ को खत्म करने पर भी काम करना होगा।

आतंरिक सुरक्षा और व्यापार

देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा नक्सली हैं। सरकार को इस समस्या को खत्म करने के लिए कड़ी नीति अपनाने की जरूरत है। इसके अलावा सरकार के लिए व्यापार क्षेत्र में भी कई बदलाव करने की जरूरत होगी। अमेरिका और चीन के व्यापार युद्ध से भारत किस तरह लाभ उठा सकता है, इस मामले पर सोचना भी बेहद आवश्यक है।
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