कश्मीर एक बार फिर हिंसाग्रस्त है। 18 सितंबर को उड़ी में 18 भारतीय सैनिकों के मारे जाने के बाद स्थिति और बदतर हो गई है। इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर हैं और इसमें जल्दी सुधार आने की उम्मीद नहीं है। इन पांच प्वाइंट में समझिए क्यों आने वाले समय में ये तनाव और बढ़ेगा।
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कश्मीर हिंसा
भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई कश्मीर पर दावे को लेकर रही है। पाकिस्तान के जन्म यानी 1947 से ही यह विवाद चला आ रहा है। दोनों देश पूरे कश्मीर पर अपना दावा जताते रहे हैं, जबकि अलग-अलग कुछ हिस्सों पर उनका कब्जा है। दोनों देशों के बीच हुए तीन युद्धों में से दो कश्मीर को लेकर ही लड़े गए। अब दोनों देशों के पास परमाणु बम भी हैं।
सप्ताह के आखिर में खून खराबा
उड़ी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को दोषी ठहराया। साथ ही कई सारे मिलिट्री अधिकारियों ने भी डिप्लोमेटिक रवैया अपनाने के बजाय पाकिस्तान समर्थित समूहों को हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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आर्थिक सुधारों पर ब्रेक
- फोटो : pti
राजनीतिक रूप से इसके गहरे निहितार्थ हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश को काफी उम्मीदें हैं। मोदी के पास आज भी पुतिन की तरह 81 फीसदी की लोकप्रियता है। 61 फीसदी भारतीय मानते हैं कि देश सही दिशा में जा रहा है। हालांकि, मौजूदा हालात में इन सब चीजों को बनाए रखना मोदी के लिए बड़ी चुनौती है।
सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक और इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर प्रणाली, गवर्नमेंट रेगुलेशन और विदेशी निवेश को लेकर 30 वादे किए थे और इनमें केवल 7 पूरे हुए हैं।
दूसरी ओर क्षेत्रीय चुनाव शुरू हो रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपने वादे पूरे करना मुश्किल होता जा रहा है। साथ ही शहीद होते जवानों को लेकर प्रधानमंत्री को कमजोर भी नहीं दिखना है। प्रधानमंत्री ने ही चुनावों के समय पिछली सरकार पर सॉफ्ट रुख रखने का आरोप लगाया था। आने वाले सालों में चुनावों के दरम्यान अपने समर्थकों को साथ रखने के लिए प्रधानमंत्री के सामने दृढ़ और कठोर दिखने की भी चुनौती है।
इस पाकिस्तान का क्या करें?
- फोटो : file photo
कश्मीर हिंसा हो या कोई हमला.. पाकिस्तान अपनी मिलीभगत से लगातार इनकार करता रहा है। पाकिस्तान को पता है कि वह भारत के मुकाबले कमजोर स्थिति में है। क्रेडिट सुइस की ओर से कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक, भारत के पास दुनिया की पांचवीं सबसे ताकतवर मिलिट्री है, जबकि इस मामले में पाकिस्तान का नंबर ग्याहरवां है। 66 वर्षीय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का स्वास्थ्य खराब रहता है। राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर कराए गए एक सर्वे के मुताबिक पाकिस्तान का नंबर 14वां है, जबकि भारत की रैकिंग 70 है।
यूएन आमसभा में नवाज शरीफ ने दुनिया को अपने पाले में खींचने की कोशिश की। अमेरिका, जापान, तुर्की और ब्रिटेन के जरिए पाकिस्तान ने कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की। हालांकि, पाकिस्तान अपनी इस कोशिश में कामयाब नहीं रहा। जैसा कि बान की मून के संबोधन में कश्मीर का जिक्र भी नहीं आया।
दक्षिण पूर्व एशिया में चीन ही एक मात्र देश है, जो जनसंख्या, अर्थव्यवस्थाा और मिलिट्री के मामले में भारत पर भारी है। चीन, पाकिस्तान में 46 बिलियन डॉलर के निवेश पर सहमत है। पाकिस्तान चीन से हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार भी है। इसके साथ ही चीन पाकिस्तान के न्यूक्लियर रिएक्टरों पर भी काम कर रहा है। ये समझौते दोनों देशों के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाते हैं।
दूसरी ओर चीन भारत का भी अहम व्यापारिक सहयोगी है, लेकिन भारतीय चीन को लेकर चिंतित रहते हैं और उसकी बराबरी के लिए सहयोगी ढूंढ़ रहे हैं। करीब 48 प्रतिशत भारतीय मानते हैं कि पाकिस्तान के साथ चीन के रिश्ते बड़ी समस्या है, जबकि 21 फीसदी भारतीय इसे चिंताजनक मानते हैं। चीन को लेकर भारतीयों की चिंता उसे अमेरिका और अन्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने को बाध्य करती है।