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Voter List: संसद में भी मतदाता सूची संशोधन पर मचेगा हंगामा, सरकार और विपक्ष के निशाने पर होगा बिहार चुनाव

सार

संसद सत्र में आठ नए विधेयक और कुछ नए प्रस्ताव लाए जा सकते हैं। इसमें नया आयकर कानून भी शामिल हो सकता है, लेकिन विपक्ष लगातार ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा कराने की मांग करता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बताते हुए इससे बचने की कोशिश करता रहा है।
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नया संसद भवन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र में वोटर लिस्ट रिवीजन के मामले पर जमकर हंगामा हो सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी बात को मजबूती के साथ रखने के लिए इस सत्र में संसद के अंदर और बाहर बढ़त बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

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कांग्रेस-राजद इस सत्र में पूरी मजबूती के साथ मुसलमान समुदाय के लोगों के वोट काटे जाने का मुद्दा उठा सकते हैं, वहीं भाजपा चुनाव आयोग द्वारा मिल रही जानकारियों के माध्यम से पाकिस्तान-बांग्लादेश और नेपाल के नागरिकों के मतदाता सूची में शामिल होने का मुद्दा उठा सकती है।

केंद्र सरकार में शामिल टीडीपी ने भी मतदाता सूची के स्पेशल रिवीजन पर सवाल खड़ा करके सरकार के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सरकार इससे कैसे निपटती है, यह देखने वाली बात होगी।
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ओडिशा में एक छात्रा के यौन उत्पीड़न संबंधी मामले में बीजू जनता दल ने पूरे राज्य में व्यापक बंद और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है। इस बंद को जिस तरह आम लोगों का समर्थन मिल रहा है, यह विवाद और गंभीर रूप में सामने आ सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर भी संसद में चर्चा कराने की मांग कर सकते हैं।

संसद सत्र में आठ नए विधेयक और कुछ नए प्रस्ताव लाए जा सकते हैं। इसमें नया आयकर कानून भी शामिल हो सकता है, लेकिन विपक्ष लगातार ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा कराने की मांग करता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बताते हुए इससे बचने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीट टकराव देखने को मिल सकता है। वक्फ कानून संशोधन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच हुए विवाद का समझौता कराने जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।    

प्रधानमंत्री ने संसद सत्र शुरू होने के पहले 20 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इसमें अहम मुद्दों पर सर्वानुमति बनाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, विपक्ष को जिस तरह का अवसर हाथ में लगा है, उसे वह हाथ से जाने नहीं देना चाहेगा।

पूर्व न्यायाधीश पर भी चर्चा संभव
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के मामले में भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल सकता है। सरकार वर्मा पर महाभियोग लाने का प्रस्ताव कर सकती है। लेकिन कुछ दलों का इस मुद्दे पर रुख इस मामले को बड़े बहस के विषय में तब्दील कर सकता है। यदि पूर्व जस्टिस वर्मा पर महाभियोग चलाया जाता है और यह पारित होता है तो यह देश के इतिहास में ऐसी पहली घटना होगी।

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