भारत में आकर अंग प्रत्यारोपण कराने वाले विदेशी मरीजों की जांच होगी। इनको पहले अंगदाता के बारे में पूरी जानकारी सरकार से साझा करनी होगी, जिसके बाद इन्हें इलाज कराने की अनुमति होगी। इसके लिए जल्द ही विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त होगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण के सख्त कानूनों का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय से नोडल अधिकारी नियुक्त करने की अपील की है। साथ ही कहा, दिल्ली में मौजूद सभी देशों के दूतावास को भी इसकी जानकारी दी जाए ताकि अंग प्रत्यारोपण को लेकर नियमों का उल्लंघन न हो सके। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चन्द्रा ने पत्र में लिखा है कि विदेशों से कई तरह के अंग प्रत्यारोपण के लिए मरीज लगातार भारत आ रहे हैं। हाल ही में कुछ घटनाएं ऐसी सामने आई हैं जिनमें मरीज और अंग दाता दोनों के साथ साथ अस्पताल पर भी आपसी सांठगांठ के आरोप लगे हैं।
गड़बड़ी के कई मामले मिले
दरअसल, अंग प्रत्यारोपण के मामले में फर्जीवाड़े को लेकर अब तक कई मामले सामने आए हैं। हाल ही में म्यांमार के मरीजों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें किडनी के लिए दाताओं को बड़ी राशि का भुगतान करने के आरोप लगे हैं। आरोप यह भी है कि यूके सहित दुनिया भर से अमीर मरीज ऑपरेशन के लिए भारत आते हैं और म्यांमार के गरीब उन्हें अंग बेचते हैं।
भारत के बाहर दूतावास को भी पत्र
स्वास्थ्य सचिव ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि जिन देशों के भारत में दूतावास हैं और जिनके बाहर देशों में है, उन सभी को भारत में अंग प्रत्यारोपण के सख्त कानूनों के बारे में पत्र लिखा जाए। ताकि अपने मरीजों की प्राथमिक निगरानी स्वयं कर सकें। इसके बाद भारत में विदेश मंत्रालय इसका सत्यापन करेगा। विदेश मंत्रालय में तैनात होने वाले नोडल अधिकारी की जानकारी राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के निदेशक डॉ. अनिल कुमार के साथ साझा की जाए।