वर्तमान सरकार को नौकरियों के मुद्दे पर विपक्ष के सबसे ज्यादा हमले का शिकार होना पड़ा था। राहुल गांधी ने अपनी हर रैली में देश के बेरोजगार युवाओं का मामला उठाकर कई बार भाजपा के लिए असहज स्थिति उत्पन्न कर दी थी। यही कारण है कि इस बार पार्टी इस मोर्चे पर कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। लेकिन इसके लिए बीजेपी सरकार सरकारी नौकरियों की जगह रोजगार सृजन को ही ज्यादा तरजीह दे सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार युवाओं को अपना व्यापार करने के लिए बड़ी मात्रा में लोन देने की योजना पर काम कर सकती है। केंद्र सरकार मुद्रा लोन योजना को अपनी बड़ी सफलता मानती है। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए अब पचास लाख तक के लोन को लेने के लिए सरकार प्रक्रिया आसान कर सकती है। इस दायरे में युवाओं के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के लिए भी लोन लेने की सुविधा में आसानी दी जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार जीएसटी दरों में भी बड़ा बदलाव कर सकती है। अभी के सबसे ऊंचे रेट 28 फीसद में सबसे ज्यादा विलासिता वाली कुछ (चार-पांच) वस्तुओं को छोड़कर सबको इस दायरे से बाहर कर दिया जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव 12 फीसदी और 18 फीसदी की दरों के साथ किया जा सकता है।
सरकार इन दो दरों की जगह 16 फीसदी की एक दर तय कर सकती है जिसमें सबसे ज्यादा वस्तुएं आएंगी। जबकि सबसे निम्न श्रेणी पांच फीसदी में सामान्य वस्तुएं आएंगी। लेकिन इस श्रेणी में भी घरेलू उपयोग की अतिमहत्त्वपूर्ण वस्तुओं को बाहर रखा जाएगा।
भाजपा का मानना है कि इस चुनाव में महंगाई का मुद्दा न बनना, उसके लिए सबसे ज्यादा फायदे का सौदा साबित हुआ है। एक भाजपा नेता के मुताबिक, अगर महंगाई होती तो पार्टी का कोई भी मुद्दा जनता पर असर नहीं करता। इसलिए इस बार भी खाद्य वस्तुओं की कीमत कम करके रखना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी।
ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार एक तरफ तो किसानों की आय दोगुना करना चाहती है जो उनकी फसलों के दाम बढ़ाए बिना संभव नहीं लगता, दूसरी तरफ उसे महंगाई भी नहीं बढ़ने देनी है। ऐसे में दोनों मोर्चे पर एक साथ निपटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
भाजपा को अपने वायदों पर खरा उतरने के लिए भारी मात्रा में पैसे की जरूरत पड़ेगी। जानकारी के मुताबिक, इसके लिए भी रणनीति पर विचार कर लिया गया है। वर्तमान कार्यकाल की प्रणाली से उलट सरकार इस बार बाजार से भी पैसा उठा सकती है।
इसे अंजाम देने के लिए कुछ बॉन्ड भी जारी किए जा सकते हैं। बॉन्ड जारी करने की योजना पार्टी की अटल बिहारी सरकार में भी अपनाई गई थी जो काफी सफल रही थी, पार्टी उसी फार्मूले को अपनाकर एक बार फिर अपनी सफलता की राह देख रही है।