महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से आदेश हासिल करने की कोशिश में लगे याचिकाकर्ता की दलील है कि इस मामले की जांच में कई खामियां थी, इनमें चार गोलियों की बात को नजरअंदाज करना भी शामिल है।
मेडिकल सबूत का जिक्र करते हुए अभिनव भारत संस्था के ट्रस्टी पंकज फडनीस ने दावा किया कि गांधी को लगी तीसरी गोली की फोरेंसिक जांच ही की गई और पुलिस के कहने के बावजूद शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। केवल दो गोलियों की फोरेंसिक जांच ही कराई गई थी।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद मेडिकल सबूत से पता चलता है कि दो घाव खतरनाक थे लेकिन घातक नहीं थे। फडनीस ने अपना एक बयान 7 मार्च और दूसरा 10 मार्च को कोर्ट में दाखिल किया। इसमें उन्होंने तीन गोली की थ्योरी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि चौथी गोली चलने की जांच किए जाने की जरूरत है जोकि गोडसे के अलावा किसी अन्य ने चलाई थी। जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने छह मार्च को इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और कहा कि वह भावनाओं पर नहीं बल्कि सबूतों के आधार पर कोई फैसला लेंगे।