रेलवे से सेना की बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को प्राथमिकता देने और हथियार व सैनिकों को ले जाने वाली विशेष ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने को कहा गया है। ताकि चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा पर सैनिकों की तैनाती तेजी से की जा सके। 73 दिन तक चले दोकलम गतिरोध के बाद सेना ने पूर्वोत्तर में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया था।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया है, रेलवे ने सेना की विशेष जरूरतों पर काम शुरू भी कर दिया है। सेना को ऑनलाइन ट्रेन मॉनिटरिंग सिस्टम मुहैया कराने का फैसला किया गया है। इससे सेना सैनिकों और हथियारों को विभिन्न जगहों पर ले जाने वाली विशेष ट्रेनों पर रियल टाइम में नजर रख सकेगी।
रेलवे ने अपने अधिकारियों को पूर्वोत्तर और पाकिस्तान सीमा से लगती रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों पर भेजने को भी राजी हो गया है। ताकि वे सेना की आधारभूत ढांचे की जरूरतों को समझ सकें।
सूत्र की मानें तो सेना की ओर से इस्तेमाल की जा रही विशेष ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जाएगी, जिससे सैनिक और हथियारों को पहुंचाने में देर न हो। अभी ये विशेष ट्रेनें बीस से तीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं।
पूर्वोत्तर में बनेंगे सुविधा केंद्र
बताया गया है कि रेलवे सैन्य मुख्यालय के उस प्रस्ताव पर भी सहमत हो गया है, जिसमें उत्तर पूर्व के मुख्य स्टेशनों पर विशेष सुविधाएं देने की बात कही गई है। ताकि अरुणाचल से लगती भारत-चीन सीमा के विभिन्न सेक्टरों में हथियारों को तेजी से पहुंचाया जा सके। सूत्र का कहना है कि सेना के उच्च अधिकारियों की ओर से रेलवे को रणनीतिक जरूरतों की जानकारी दे दी गई है और रेलवे ने काम शुरू कर दिया है। यह सुविधा केंद्र अरुणाचल प्रदेश के भालूकुंग, असम में सिलापथार, मकुम और नगालैंड में मोकोचुंग, दीमापुर में बनाए जाएंगे।
750 ट्रेनों का इस्तेमाल करती सेना
रेलवे हर साल विभिन्न ऑपरेशन जरूरतों के हिसाब से 750 विशेष ट्रेनों का इस्तेमाल करता है। इसमें टैंक, तोप, युद्धक वाहन और मिसाइलों को एक जगह से दूसरी जगहों पर ले जाना शामिल है। इसके लिए सेना की ओर से रेलवे को दो हजार करोड़ का सालाना भुगतान भी किया जाता है।