फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वैज्ञानिकों का दावा-कोरोना के इलाज में फैविपिराविर की सफलता के कोई ठोस प्रमाण नहीं

Mon, 22 Jun 2020 06:34 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला , नई दिल्ली
विज्ञापन
Favipiravir - फोटो : Social Media
विज्ञापन
कोरोना के इलाज में केंद्र सरकार ने फैविपिराविर (फैवि-फ्लू) के इस्तेमाल की अनुमति दी है। दूसरी तरफ, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक दवा के लाभ का ठोस सबूत नहीं मिला है। महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एसपी कलंत्री का कहना है कि सरकार को इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
विज्ञापन


सोशल मीडिया पर हर कोई दवा के प्रचार-प्रसार में जुट गया है। उन्होंने बताया कि चीन में 80 मरीजों पर अध्ययन के दौरान लोपिनाविर/रिटोनाविर की तुलना में यह दवा तेज है, लेकिन यह बहुत छोटा अध्ययन है। इसके आधार पर मरीजों को यह दवा नहीं दी जा सकती।  

कैंसर ग्रिड इंडिया के प्रोफेसर डॉ. रमेश बताते हैं कि अब तक एक भी अध्ययन ऐसा नहीं मिला है, जिसके आधार पर इसके बेहतर परिणाम बताए जा सकें। फैविपिराविर दवा को लेकर भारत में ही 150 मरीजों पर अध्ययन का दावा किया जा रहा है। इस अध्ययन के बारे में जानकारी लेने के लिए जब ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स से संपर्क किया गया तो जवाब नहीं मिला।
  • शर्तों के साथ ही होगा इस्तेमाल
औषधि महानियंत्रक के अधिकारी ने बताया कि दवा को आपातकालीन स्थिति और मरीज या तीमारदार की अनुमति के बाद ही इस्तेमाल में लाने की मंजूरी है। अभी परीक्षण चल रहे हैं, ऐसे में दवा की प्रामाणिकता साबित होने में अभी और वक्त लगेगा। कम असर वाले मरीजों में दवा के बेहतर नतीजे मिले हैं।
  • हल्के मामलों में 88 फीसदी सफल
ग्लेनमार्क के अनुसार, परीक्षणों में  हल्के व मॉडरेट केस में दवा के 88 फीसदी सफल परिणाम मिले हैं। 20 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों में दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। तीसरे फेज के ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद कंपनी ने 12 मई को इसे शुरू किया है। जिसका परिणाम जुलाई तक सामने आ सकता है। हालांकि 88 फीसदी सफल परिणाम किन अध्ययन में है?
  • रेमडेसिविर के लिए दो कंपनियों को मंजूरी
सीडीएससीओ ने गिलियड कंपनी की जेनेरिक दवा रेमडेसिविर बनाने के लिए सिप्ला और हेटेरो कंपनी को अनुमति दी है। बीडीआर, जुबिलेंट, मायलान और डॉ. रेड्डी लैब्स के आवेदन पर भी विचार किया जा रहा है। हेटेरो और सिपला को दवा निर्माण और आपूर्ति की मंजूरी उन्हीं शर्तों के आधार पर है, जो अमेरिकी कंपनी गिलियड के लिए हैं। इस दवा को भारत में बनाने के लिए छह कंपनियों ने करार किए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें