प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्थित औपचारिक आवास में कितनी बिजली की खपत होती है, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह बात एक आरटीआई सवाल के जवाब में कही गई है। इसमें आवेदक को कहा गया है कि प्रधानमंत्री के आवास के लिए अलग से बिजली का कोई मीटर नहीं है। प्रधानमंत्री आवास के बिजली के बिल के बारे में यह जानकारी सेवानिवृत सरकारी कर्मचारी और आरटीआई कार्यकर्ता जगजीत सिंह वालिया ने केंद्रीय लोक कल्याण विभाग (सीपीडब्लूडी) से मांगी थी।
सीपीडब्लूडी सरकारी इमारतों का रखरखाव तो करता ही है। साथ ही संसद, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास के बिजली के बिल भी भरता है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जब विभाग ने अपने जवाब में कहा कि वह प्रधानमंत्री आवास में खपत बिजली का रिकॉर्ड नहीं रखता है, तो उन्होंने इस बात की पड़ताल की। जिसमें पता चला कि विभाग प्रधानमंत्री आवास के साथ साथ उनके ऑफिस से संबंधित सारी जानकारी रखता है। लेकिन उन्हें किसी के भी साथ साझा नहीं करता है।
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इससे पहले जून, साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिजली का बिल करीब 21 लाख आया था। एक वरिष्ठ सीपीडब्लूडी अधिकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास के लिए कोई अलग से मीटर नहीं है। रेस कोर्स रोड कॉम्प्लेक्स के लिए एक ही मीटर है, जिसमें प्रधानमंत्री आवास, एसपीजी कार्यालय, सिक्योरिटी लाइट, एमआई रूम, पीएमओ, बागवानी पंप, अस्थायी प्रकाश व्यवस्था शामिल हैं।
मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं का बिजली का बिल लाखों रुपये आता है। साल 2015 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित आवास का बिल 91,000 रुपये आने की बात भी सुर्खियों में थी। यह बिल अप्रैल और मई का था। जिसमें उनके निवास के कैंप ऑफिस का शुल्क भी शामिल था।
जानकारी के लिए बता दें कि ऐसे बहुत से राजनेता हैं जिनके बिजली के बिल लाखों में आते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली का बिल 3.62 लाख आ चुका है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी 1.76 लाख का बिल मिला था। जबकि इसके उलट परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को 53 रुपये और 761 रुपये का बिल मिल चुका है। जो कि अन्य राजनेताओं की अपेक्षा बेहद कम है।