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उपराष्ट्रपति धनखड़ बोले: संविधान के प्रावधान को खारिज करने का दुनिया में दूसरा कोई उदाहरण नहीं

Sat, 03 Dec 2022 05:30 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली।

सार

धनखड़ ने कहा, संविधान की प्रस्तावना में ‘हम भारत के लोग’ का उपयोग किया है, संसद ‘भारत के लोगों’ की इच्छा को प्रतिबिंबित करती है। इसके मायने हैं कि सत्ता लोगों, उनके विवेक और उनकी इच्छा में निहित है।
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Vice President Jagdeep Dhankhar (file photo) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून (एनजेएसी) को रद्द कर दिया तो संसद में इस पर कोई आवाज तक नहीं हुई, इसे लेकर मैं भौंचक था। यह बहुत ही गंभीर मुद्दा था। दुनिया में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता जहां लोगों की इच्छा को प्रतिध्वनित करने वाले संविधान के एक प्रावधान को इस तरह रद्द कर दिया गया हो। धनखड़ ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की मौजूदगी में शुक्रवार को लक्ष्मीमल्ल सिंघवी स्मृति व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि कहा, संसद से बने कानून को, जो देश की जनता की इच्छा को दर्शाता था, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।

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संसद ‘भारत के लोगों’ की इच्छा को प्रतिबिंबित करती है
धनखड़ ने कहा, संविधान की प्रस्तावना में ‘हम भारत के लोग’ का उपयोग किया है, संसद ‘भारत के लोगों’ की इच्छा को प्रतिबिंबित करती है। इसके मायने हैं कि सत्ता लोगों, उनके विवेक और उनकी इच्छा में निहित है। धनखड़ ने कहा, एनजेएसी कानून पर लोकसभा ने एकमत से फैसला किया था, राज्यसभा में भी सर्वसम्मति से पारित हुआ। इस दौरान सिर्फ एक अनुपस्थिति थी। भारत के लोगों की इच्छा एक सांविधानिक प्रावधान में तब्दील हुई थी। लोगों की शक्ति, जो एक वैध मंच के जरिये सामने आई थी, उसे पलट दिया गया।

धनखड़ ने कहा, न्यायिक प्रबुद्ध वर्ग, विचारवान मस्तिष्क और बुद्धिजीवियों से अपील करता हूं, इस घटना के समानांतर पूरी दुनिया में कोई उदाहरण तलाशें जिसमें संविधान के प्रावधान को रद्द किया गया हो। धनखड़ ने शीर्ष कोर्ट की ओर से संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत का संदर्भ देते हुए कहा, हमने इसे भी मान लिया। पर, कानून के छात्र के रूप में सवाल यह है कि क्या संसद की स्वायत्तता से समझौता किया जा सकता है? क्या भविष्य की संसद अतीत की संसद के फैसले से बंधी रह सकती है? 
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अनुभव बताता है कि सबसे कमजोर लोगों में भी अपने पसंदीदा नेता को चुनने की राजनीतिक चेतना होती है। इसलिए, हमें लोकतांत्रिक प्रक्रिया की हर प्रकार की उच्चवर्गीय समझ को खारिज करना चाहिए, जो हम लगातार सुनते रहते हैं कि केवल शिक्षित ही बेहतर निर्णय लेने वाले होते हैं। -जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, सीजेआई

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