फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CDS: 'पाकिस्तानी ड्रोन और गोला-बारूद से भारत को कोई नुकसान नहीं', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले सीडीएस जनरल अनिल चौहान

Wed, 16 Jul 2025 09:38 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने मानेकशॉ सेंटर में यूएवी और सी-यूएएस के क्षेत्रों में विदेशी निर्माताओं से आयात किए जा रहे महत्वपूर्ण उत्पादों पर लगी प्रदर्शनी का दौरा किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने हमें दिखाया है कि हमारे इलाके के लिए स्वदेशी रूप से विकसित काउंटर-यूएएस सिस्टम क्यों महत्वपूर्ण हैं?
विज्ञापन
सीडीएस जनरल अनिल चौहान। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को कहा कि 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने निहत्थे ड्रोन और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। इनमें से किसी ने भी भारतीय सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। अधिकांश को निष्प्रभावी कर दिया गया और कुछ को लगभग सही हालत में बरामद भी किया गया। 
विज्ञापन

  चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने मानेकशॉ सेंटर में यूएवी और सी-यूएएस के क्षेत्रों में विदेशी निर्माताओं से आयात किए जा रहे महत्वपूर्ण उत्पादों के स्वदेशीकरण पर लगी प्रदर्शनी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने हमें दिखाया है कि हमारे इलाके के लिए स्वदेशी रूप से विकसित काउंटर-यूएएस सिस्टम क्यों महत्वपूर्ण हैं? हमें अपनी सुरक्षा के लिए निवेश और निर्माण करना होगा। 

ये भी पढ़ें: CDS जनरल अनिल चौहान ने की ऑपरेशन सिंदूर की समीक्षा, कहा- आधुनिक युद्ध के लिए तैयार हो सेना
विज्ञापन

 



युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि  आपको क्या लगता है कि क्या ड्रोन युद्ध में विकासवादी बदलाव ला रहे हैं या क्रांतिकारी बदलाव? मुझे लगता है कि उनका विकास विकासवादी है और युद्ध में उनका इस्तेमाल बहुत क्रांतिकारी रहा है। जैसे-जैसे ड्रोन की तैनाती और दायरा बढ़ा, सेना ने क्रांतिकारी तरीके से ड्रोन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, आपने हमारे द्वारा लड़े गए कई युद्धों में ऐसा देखा है। 

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि वैश्विक स्तर पर हाल के संघर्षों ने यह साफ हुआ है कि ड्रोन किस तरह से सामरिक संतुलन को असमान रूप से बदल सकते हैं। असममित ड्रोन युद्ध बड़े प्लेटफार्मों को कमजोर बना रहा है और सेनाओं को वायु सिद्धांतों, सी-यूएएस के विकास के अनुकूली कदमों के वैचारिक पहलुओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

 



सीडीएस ने कहा कि हम आयातित विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर भरोसा नहीं कर सकते, जो हमारे आक्रामक और रक्षात्मक मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। विदेशी तकनीक पर निर्भरता हमारी तैयारियों को कमजोर करती है। उत्पादन बढ़ाने की हमारी क्षमता को सीमित करती है तथा इससे जीवन निर्वाह के लिए महत्वपूर्ण पुर्जों की कमी और चौबीसों घंटे उपलब्धता की कमी हो जाती है।

कार्यशाला के लिए अपने संदेश में सीडीएस ने लिखा कि गैर-संपर्क युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे परिदृश्य में यूएवी एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरे हैं। भारत जैसे राष्ट्र के लिए यूएवी और सी-यूएएस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता न केवल एक रणनीतिक अनिवार्यता है, बल्कि यह भारत को अपना भाग्य बनाने, अपने हितों की रक्षा करने और भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के बारे में भी है।
विज्ञापन



महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों को स्वदेशी रूप बनाने की पहल

मानेकशॉ सेंटर में वर्कशॉप और प्रदर्शनी का आयोजन मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) और सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (सीईएनजेओडब्ल्यूएस) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी उपकरणों की जगह स्वदेशी विकल्पों को बढ़ावा देना है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती देना और रक्षा अनुसंधान और निर्माण में घरेलू उद्योगों को शामिल करना है। यह कार्यक्रम देश की सुरक्षा नीति में स्वदेशीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि रणनीतिक और तकनीकी रूप से भारत और भी मजबूत होगा।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें