फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेपालियों से शादी करने पर भारतीय महिलाओं के सामने नई मुश्किल, करना पड़ेगा लंबा इंतजार

Mon, 22 Jun 2020 07:12 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
नेपाल में किसी से शादी करने पर नागरिकता के लिए सात साल का इंतजार - फोटो : social media
विज्ञापन

नेपाल की सत्तारुढ़ पार्टी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सचिवालय की एक बैठक में नेपाली पुरुषों के साथ विवाह करने वाली विदेशी महिलाओं को शादी के सात साल बाद नागरिकता देने के फैसले को अनुमति दे दी गई है। सचिवालय की बैठक में पार्टी ने यह फैसला लिया है जिसके प्रस्ताव को संसदीय राज्य मंत्रालय और सुशासन समिति संसद को भेजेगी।

विज्ञापन


फैसले की जानकारी देते हुए पार्टी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि सचिवालय की बैठक में नेपाली पुरुष से शादी करने वाली विदेशी महिला को सात साल बाद अपनी पुरानी नागरिकता त्यागने का प्रमाण या उससे जुड़ा प्रमाण दिखाकर नेपाली नागरिकता दी जाएगी। उनका कहना है कि यह कानून भारत समेत सभी विदेशी महिलाओं पर लागू होगा।

फैसले का हो रहा है विरोध
नेपाल की सत्तारुढ़ पार्टी के इस फैसले का मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। विदेशी महिलाओं को नागरिकता देने के फैसले पर बीते दो सालों से कई पार्टियों में मतभेद है। राष्ट्रीय असेंबली में नेपाली कांग्रेस के सांसद राधेश्याम अधिकारी ने कहा है कि नागरिकता देने के पिछले तरीके को देखा जाए तो एक विवाहित महिला को जब चाहे नागरिकता मिल सकती है लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का यह फैसला संविधान के अनुरूप नहीं है।
विज्ञापन


नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 11 (6) के प्रावधान के अनुसार, नेपाली पुरुष से विवाह करने वाली विदेशी महिला कानून के अनुसार नेपाल की नागरिकता ले सकती है। नागरिकता कानून के अनुसार, विदेशी महिला को नागरिकता लेते समय वैवाहिक संबंध और पिछली नागरकिता त्यागने के प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं।

अधिनियम में संशोधन के बिल के बारे में नेपाली कांग्रेस और तराई-केंद्रित दलों ने कहा है कि संविधान के अनुसार पिछले प्रावधान को जारी रखा जाना चाहिए। चूंकि सत्तारूढ़ दल के पास विधानमंडल-संसद के दोनों सदनों में बहुमत है इसलिए बिल सीपीएन (माओवादी) के निर्णय के अनुसार पारित किया जा सकता है।

क्यों हो रहा है विरोध
इस संशोधन का विरोध कर रहे तराई-केंद्रित जनता समाजवादी पार्टी के नेता लक्ष्मण लाल कर्ण ने भी सीपीएन (माओवादी) के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि चूंकि नेपाल और भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, इसलिए इस तरह की व्यवस्था ने लोगों की भावनाओं पर हमला किया है। हमारी मांग मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की है।

नेपाल में इस प्रावधान को लेकर सोशल मीडिया पर भी असंतोष के स्वर देखे गए हैं। भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतर-देशीय शादियां होना आम बात है। भारतीय बेटियां नेपाल में ब्याही जाती हैं जबकि नेपाली बेटियां भारत की बहू बनती हैं।

भारत को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है ये कदम
नेपाल के गृहमंत्री राम बहादुर थापा का कहना है कि नागरिकता नियम में बदलाव का ये प्रस्ताव भारत को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। हाल ही में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि नेपाल का भारत के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता है जिसे दुनिया की कोई ताकत नहीं तोड़ सकती है।

अब नेपाल के इस कदम के बाद लग रहा है कि रोटी-बेटी का ये रिश्ता कमजोर हो रहा है। वहीं, भारत में भी विदेशी महिला को विवाह के सात साल बाद नागरिकता मिलने का प्रावधान है लेकिन ये नेपाल की महिलाओं पर लागू नहीं है।

नेपाल के साथ चल रहा है विवाद
भारत और नेपाल के बीच इस समय कूटनीतिक स्तर पर विवाद चल रहा है। नेपाल ने अपने नक्शे में संशोधन को कानूनी मान्यता दे दी है, इस नक्शे में लिपुलेख समेत तीन विवादित क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है। वहीं भारत का कहना है कि नेपाल के साथ विवाद को बातचीत के स्तर पर सुलझाया जा रहा है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें