महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी का खेल शुरू हो चुका है। शिवसेना की सीटें भले ही बिग ब्रदर भाजपा से कम हैं मगर उसमें तोल-मोल की ताकत अधिक है। वह आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री देखना चाहती है। भाजपा देवेंद्र फडणवीस को दूसरी पारी देने की बात चुनाव से पहले कहती आई है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अब सत्ता में भाजपा के साथ हर स्तर पर 50-50 की भागीदारी चाहते हैं। उनकी मांग यह भी है कि पहले ढाई साल में मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा।
भाजपा चुप है और फडणवीस ने दिवाली के बाद संभावनाओं को खंगालने की बात कही है। हालांकि, उनका दावा है कि 105 सीटें पाने वाली भाजपा के पास 15 निर्दलियों या भाजपा के बागियों का समर्थन है। यानी वह 120 सीटों पर पहुंच गई है, जो 2014 के 122 सीटें जीतने के मुकाबले दो ही कम हैं। ये आंकडे़ शिवसेना को इशारा कर रहे हैं कि भाजपा की स्थिति उतनी नहीं बदली, जितनी दिख रही है, जबकि शिवसेना 2014 की 63 सीटों से खिसक कर इस बार 56 पर आ गई है। यानी, इस बार उसकी सात सीट कम आई है। शिवसेना इसे अनदेखा कर मुख्यमंत्री पद के लिए कमर कसे बैठी है। तय है कि ऐसी हालत में दोनों में से किसी एक दल को झुकना होगा।