कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर हो रहा विचार
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इशरत जहां के आतंकी होने या न होने संबंधी गायब कागजात की जांच के सिलसिले में गृह मंत्रालय की एक सदस्यीय कमेटी ने मामले के दो अहम कड़ी से पूछताछ नहीं की। यह कड़ी हैं पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम और अपने बयान से विवाद खड़ा करने वाले तत्कालीन गृह सचिव जी के पिल्लई।
कमेटी के सदस्य और संयुक्त सचिव बी के प्रसाद ने कहा है कि उन्होंने जी के पिल्लई से कोई पूछताछ नहीं की है। वहीं, गृह मंत्रालय कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर विचार कर रहा है।
हालांकि मंत्रालय में सुगबुगाहट है कि इस सिलसिले में प्रसाद पिल्लई से अनौपचारिक तौर पर मिलने जरूर गए थे। पिल्लई ने इस बात पर चुप्पी साध रखी है। अमर उजाला की ओर से पूछे गए सवाल का पिल्लई ने जवाब नहीं दिया। इससे जुड़े सभी विवादों को दरकिनार करते हुए गृह मंत्रालय इस कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर विचार कर रहा है।
गृह सचिव राजीव महर्षि और गृहमंत्री राजनाथ सिंह एक दो दिन में यह फैसला ले लेंगे। उधर जांच के सिलसिले में प्रसाद और पूर्व निदेशक अशोक कुमार की बातचीत के टेप से साफ हो गया है कि मामले को रिकॉर्ड पर लाने से पहले सिखाने-पढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन गृह मंत्रालय के आला अधिकारी इस बात से इनकार कर रहे हैं।
अब गृह मंत्रालय एक रिपोर्टर की फोन पर की गई बातचीत टेप करने की घटना को जांच कर उसे ज्यादा तूल देने के मूड में नहीं है।