मास्क लगाए एक बुजुर्ग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोरोना वायरस से सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों को है। इसके बावजूद महामारी के दौर में बुजुर्गों को अपनों ने ही परेशान किया। उन्हें यातना दी। यहां तक की जरूरी दवाएं और पौष्टिक खाना तक नसीब नहीं हो सका।
हेल्प एज इंडिया द्वारा वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों पर किए गए सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 48.7 फीसदी बुजुर्गों ने बताया कि महामारी के बीच उनके बच्चों द्वारा ही उनसे दुर्व्यवहार किया गया। सर्वेक्षण में शामिल 74.4 फीसदी बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने महामारी के बीच अनादर का सामना किया।
25.6 फीसदी ने बताया कि उन्हें थप्पड़ तक मारा गया। 30.8 फीसदी ने मौखिक दुर्व्यवहार की बात कही है जबकि 17.9 फीसदी ने आर्थिक शोषण की शिकायत की। वृद्धाश्रम में रहने वाले 34.1 फीसदी ने बताया कि महामारी के दौर में उन्होंने देखभाल करने वाले या परिवार के सदस्यों के बदले व्यवहार को भी महसूस किया।
रिपोर्ट के अनुसार 66.2 फीसदी बुजुर्गों को टीके की एक डोज लगी थी जबकि 33.8 फीसदी को अब तक एक भी खुराक नहीं लगी है।
बुजुर्गों की देखभाल करने वाले भी तंग
महामारी के बीच वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की देखभाल करने वाले लोग भी तंग रहे। बुजुर्गों की देखभाल में जुटे 60.2 फीसदी कर्मचारियों ने बताया कि महामारी के दौरान जरूरी वस्तुओं और सेवाओं को हासिल करना मुश्किल हुआ।
कोरोना के कारण वृद्धाश्रमों में भोजन, किराने का सामान और दवाओं जैसी जरूरी चीजों के लिए परेशान होना पड़ा। यही नहीं 34.3 फीसदी वृद्वाश्रमों में महामारी के दौरान कर्मचारियों का भी संकट रहा जिस कारण बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ा।