पिछले कई महीनों से एम वनिता लगभग गुमनाम रूप से यानी बाहर से चंद्रयान 2 के लिए काम कर रही थीं। इसकी जटिलताओं के आसपास काम करना और इसे खत्म करने में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है। पूरे समय में इसरो ने परियोजना निदेशक या किसी मिशन के प्रमुख के बारे में बहुत कम जानकारी प्रदान की है जो इसे गर्व से दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।
सुश्री वनिता यूआर राव सैटेलाइट सेंटर से एक प्रतिष्ठित ग्रहीय मिशन का नेतृत्व करने वाली एकमात्र महिला हैं। जो पहले कार्टोसैट-1, ओशनसैट-2 और मेघा-ट्रोपिक टीमों का हिस्सा रही हैं। अंतरिक्ष यान के पहलुओं के लिए मिशन निदेशक के रूप में सुश्री वनिता का समर्थन यूआरएससी से ऋतु करिधाल ने किया हैं। सुश्री करिधाल 2013 में मार्स ऑर्बिटर मिशन के लिए आईआईएमसी एलुम्ना की उप निदेशक संचालन थीं। ये दोनों महिलाएं वर्तमान समय में बेंगलुरु स्थित यू आर राव अंतरिक्ष केंद्र में तैनात हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने प्रक्षेपण से पहले जारी एक संदेश में इन दोनों महिलाओं की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा ही यह सुनिश्चित किया कि महिला वैज्ञानिक पुरुष वैज्ञानिकों के बराबर रहें। हमने पाया कि ये महिला वैज्ञानिक यह कार्य करने में सक्षम हैं और इसीलिए हमने उन्हें यह जिम्मेदारी दी।
चंद्रयान 2 के डी-डे से दो सप्ताह पहले श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र में एक गार्ड ऑफ चेंज था। एस पांडियन ने 30 जून को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के रूप में पदभार संभाला। इसरो मिशन को भेजने के लिए वीएसएससी के तिरुवनंतपुरम में लॉन्च वाहन केंद्र से एस राजाराजन को लाया गया।
एक अधिकारी ने कहा कि सिस्टम ऐसे बदलाव का ध्यान रखता है। लॉन्चर टीम का नेतृत्व वीएसएससी के जयप्रकाश कर रहे हैं। इसके प्रमुख केंद्रों के निदेशक वीएसएससी के निदेशक एस सोमनाथ जो मिशन के लिए जीएसएलवी एमकेआई 8 लॉन्चर प्रदान किया हैं। पी कुन्हीकृष्णन, जिनके यूआरएससी के पास अंतरिक्ष यान और लैंडर कार्यों की कुंजी है और वीवी श्रीनिवासन जिनके बंगलूरू में ट्रैकिंग केंद्र आईएसटीआरएसी अंतरिक्ष यान के महत्वपूर्ण प्रक्षेपण के बाद युद्धाभ्यास को संभालेंगे। यह भी चंद्र मिशन की कामयाबी के लिए मुख्य भूमिका में रहे हैं।