महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में मंगलवार को एमपीएससी के सैकड़ों उम्मीदवारों ने व्यापक भ्रष्टाचार और पेपर लीक का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। हाल ही में हुई भर्ती परीक्षाओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
शहर के क्रांति चौक इलाके में प्रदर्शनकारी जमा हुए। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के शीर्ष पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों की तत्काल नियुक्ति की मांग की। सोमवार को पुणे में भी इसी तरह का एक मार्च निकाला गया।
किसके जैसा चाहिए अधिकारी?
विरोध प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा, 'एमपीएससी में तुकाराम मुंढे (राज्य एफडीए आयुक्त) जैसे बेदाग छवि वाले एक कुशल अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए। तभी छात्रों को न्याय मिलेगा। हम किसान परिवारों से आते हैं और यहां पढ़ने और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए आते हैं।
मुंबई क्राइम ब्रांच मार्च में आयोजित एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्र लीक मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल करने वाली एक महिला उम्मीदवार भी शामिल है।
अपने इस्तीफे की मांगों के बीच, एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने पिछले सप्ताह कहा था कि ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने की घटना उनके भर्ती निकाय का कार्यभार संभालने से पहले हुई थी। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद आयोजित परीक्षाओं को लेकर उम्मीदवारों को संदेह है और उनकी भी जांच होनी चाहिए।
पैसा रखने वाले ही उठा रहे फायदा?
उन्होंने टिप्पणी की, 'हमें पता होना चाहिए कि क्या हो रहा है। मैं चार साल से पढ़ाई कर रहा हूं और परीक्षाएं दे रहा हूं। आज पैसा रखने वाले ही फायदा उठा रहे हैं'। आंदोलन में शामिल उम्मीदवारों में से एक ने कहा कि उन्होंने एमपीएससी पर से अपना विश्वास खो दिया है। उन्होंने दावा किया, 'हमारे साथ धोखा हुआ है। लगातार सीट नंबर वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। यह कोई संयोग नहीं हो सकता।'