मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे की मंगलवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 11वें दिन तबीयत बिगड़ गई। उनका ब्लड शुगर स्तर काफी कम हो गया, जिसके बाद वह आईवी फ्लूइड लेने को राजी हो गए। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आंदोलन कर रहे जरांगे ने करीब रात 2:30 बजे इलाज कराने पर सहमति जताई।
मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड से फोन पर हुई बातचीत के बाद यह कदम उठाया। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने जरांगे को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार मंगलवार से उनकी मांगों पर काम शुरू करेगी और उन्हें पूरा करने के लिए कदम उठाएगी।
12 सितंबर को क्यों जालना में जुटेंगे मराठा?
जरांगे ने सोमवार को पुणे, ठाणे, नासिक और मुंबई समेत प्रमुख जिलों के मराठाओं से 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की थी। गौरतलब है कि जरांगे ने 29 अगस्त को अपना मौजूदा अनशन शुरू किया था। वह मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं।
इसमें हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड लागू करना और मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। कुनबी पारंपरिक रूप से खेती से जुड़ा समुदाय है, जो आधिकारिक तौर पर ओबीसी श्रेणी में आता है। इसके चलते उसके सदस्यों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है।
मराठा आरक्षण पर सीएम फडणवीस ने दिया क्या भरोसा?
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार संविधान के तहत जो भी संभव होगा, वह करेगी। हालांकि, एक समुदाय के हिस्से से दूसरे समुदाय को देने के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी। नवी मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने मराठा आरक्षण के मुद्दे और जरांगे के आंदोलन को लेकर सरकार की देर रात हुई बैठक से जुड़ी खबरों पर यह बात कही।
जरांगे के अनशन के बीच अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी गांव में आंदोलन किया था। उनका कहना था कि ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के हिस्से की रक्षा की जानी चाहिए। फडणवीस ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने अब तक मराठा समुदाय से जुड़े सभी बड़े फैसले लिए हैं और आगे भी संविधान के दायरे में तथा अदालत के आदेशों के अनुरूप जरूरी फैसले किए जाएंगे।
जरांगे के आंदोलन को लेकर् क्या बोले फडणवीस?
उन्होंने कहा, "संविधान के तहत जो भी संभव होगा, वह निश्चित रूप से दिया जाएगा। जो भी अदालत के फैसले के अधीन होगा, उससे उसी के अनुसार निपटा जाएगा। हम एक समुदाय के हिस्से से लेकर दूसरे को देने नहीं जा रहे हैं।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल कागजों पर फैसले नहीं लिए हैं, बल्कि इन फैसलों का वास्तविक लाभ मराठा समुदाय को दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, "हम वह सब करेंगे जो संभव है। हमने बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए। सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालती है और पूरी प्रक्रिया इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या मराठा समुदाय की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों का समाधान हो चुका है, तो फडणवीस ने कहा, "जो भी मुद्दे उठाए गए थे, उनका समाधान कर दिया गया है। अगर उन्हें लगता है कि अभी भी कोई कमी है या कोई संदेह है, तो उन्हें इसे उठाना चाहिए और उनके संदेह दूर किए जाएंगे।"