जैन के मुताबिक, विहिप का मानना है कि शरिया अदालतों के जरिए देश के मुल्ला मौलवी तीन तलाक को अवैध घोषित करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विफल कर देंगे। हलाला, बहु विवाह का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है, जिसका कोई भी सभ्य-समाज समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पर्सनल ला बोर्ड का यह नया पैंतरा सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसलों को विफल करने का एक षड्यंत्र है।
वहीं जैन का यह भी मत है कि शरिया अदालतें के जरिए मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कर उनके निकाह को वैधानिक रूप देने का भी कुप्रयास किया जाएगा। जैन ने आरोप लगाया कि पर्सनल लॉ बोर्ड इनको मध्यस्थता का केंद्र बता कर अपनी इस घिनौनी करतूत पर पर्दा डालना चाहता है। उन्होंने नाइजीरिया, सूडान का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शरिया अदालतों का फैसला थोपने के कारण ही तो वहां गृह युद्ध जैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं। उन्होंने पूछा कि क्या पर्सनल लॉ बोर्ड भारत में भी यही स्थिति लाना चाहता है?
साथ ही, उन्होंने कांग्रेस और वामदलों पर निशाना साधते हुए कहा कि खापों का विरोध करने वाले आज शरिया अदालतों के पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि मुल्ला, मौलवी तो बिना शरिया अदालतों के ही रोजाना महिलाओं व मानवता के विरोध में फतवे जारी करते हैं। ऐसे में शरिया अदालतों का दर्जा मिलने पर उनके अत्याचारों की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है।