सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में 29 अक्टूबर से सुनवाई शुरू करने को कहा है। लेकिन इसके पहले ही दिल्ली में हिंदू संतों की उच्चाधिकारी कमेटी की बैठक होनी तय हुई है। यह बैठक पांच अक्टूबर को होनी है। इसमें हिंदू संत मंदिर निर्माण से संबंधित कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। यह कहना है विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का।
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने शुक्रवार को अमर उजाला से कहा कि हिंदू समाज 1950 से ही राममंदिर के लिए न्यायालय की ठोकरें खा रहा है। न्याय के नाम पर उसे हमेशा तारीख पर तारीख ही मिलती रही है।
लेकिन राममंदिर के लिए हिंदू समाज अनंतकाल तक इंतजार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को हिंदू संतों के उच्चाधिकार कमेटी की बैठक में राममंदिर निर्माण से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है। संतों के समक्ष किसी भी फैसले को लेने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा।
विहिप नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर से इस मामले की सुनवाई शुरू करने को कहा है, लेकिन अदालत ने यह साफ नहीं किया है कि इस मामले की सुनवाई रोजाना के आधार पर होगी या फिर उसे तारीखों के जाल में उलझना पड़ेगा।
यही कारण है कि अब समाज का धैर्य चुकने लगा है और अब वह इस पर कोई निर्णायक कदम चाहता है। उन्होंने कहा कि राममंदिर आंदोलन का यह सकारात्मक प्रभाव हो गया है कि अब तक हर जगह झुक जाने वाले हिंदू समाज ने अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीख लिया है।
वह प्रतिकार करना सीख गया है। ऐसे माहौल में वह राममंदिर के लिए अब और इंतजार नहीं करना चाहता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विहिप अदालत के सामने मामले की गंभीरता को देखते हुए रोजाना सुनवाई की अपील दोबारा करेगा।