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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, सुनिश्चित करें आम आदमी को न हो परेशानी

Tue, 15 Nov 2016 04:02 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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500 और 1000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने को लेकर परेशानी झेल रहे लोगों के लिए कोर्ट से कोई राहत भरी खबर नहीं आ रही है। नोटबंदी के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग पीआईएल पर केंद्र सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा है।
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साथ ही कोर्ट ने केंद्र के फैसले पर हस्तक्षेप करने की बात नकार दी है। हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार से ये जरूर पूछा है कि सरकार आम आदमी को हो रही परेशानी कम करने के क्‍या उपाय कर रही है? ये सुनवाई चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने की है।

गौरतलब है कि याचिकाओं में इस फैसले को मनमाना और तर्कहीन बताते हुए निरस्त करने की गुहार की गई है। वहीं केंद्र सरकार ने इस मामले में कैविएट दाखिल कर कहा है कि अदालत द्वारा किसी भी निर्णय लेने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
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एक साथ सभी याचिकाओं पर होगी सुनवाई

नोटबंदी पर याचिकाएं वकील विवेक नारायण मिश्रा, संगम लाल पांडेय, एस मुत्थूकुमार और आदिल अल्वी की ओर से दायर की गई हैं। गत सप्ताह दाखिल इन सभी याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई करने की गुहार की गई थी। जिसके बाद इन सभी याचिकाओं को मंगलवार को एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है। 

इन याचिकाओं में कहा गया है कि अचानक लिए गए इस फैसले से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। शादियों के मौसम सरकार के इस फैसले से लोगों को बहुत परेशान हो रही है। परिवार वालों की परेशानी यह है कि आखिर वे शादी सामारोह को कैसे अंजाम दें।

साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए सरकार का यह आदेश उनके लिए जीवन-मृत्यु का सवाल खड़ा हो गया है। साथ ही यह किसानों के लिए कमाई का वक्त है। इस फैसले से उनकी कमाई पर असर पड़ रहा है। 
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