सुप्रीम कोर्ट ने कॉरपोरेट घरानों द्वारा मोदी समेत कुछ राजनेताओं को रिश्वत देने संबंधी आरोपों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने से फिलहाल इनकार किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता संगठन के मौजूदा दस्तावेजों में एक भी प्रमाणिक साक्ष्य नहीं है। पीठ ने संगठन से कहा कि अगर उसके पास कोई पूख्ता सबूत है तो वह लेकर आए, तब विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर साक्ष्यों में दम हो तो हम किसी के खिलाफ कार्यवाही या जांच करने से गुरेज नहीं करेंगे।
न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन कॉमन काज से कहा कि जिन दस्तावेजों के जरिए आप आरोप लगा रहे हैं, उसकी कोई प्रमाणिकता नहीं है। सिर्फ कंप्यूटर इंट्री का हवाला देते हुए किसी पर आरोप लगाया जाए, तो हम जांच के आदेश नहीं दे सकते। ऐसे तो पूरे संसार पर आरोप लगा सकते हैं। पीठ ने साफ कहा कि यह महज आरोप है और मौजूदा दस्तावेज से हम संतुष्ट नहीं है। छानबीन के लिए कोई पुख्ता दस्तावेज तो होना ही चाहिए।
पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शांति भूषण से कहा कि आरोप बड़े राजनेताओं पर हैं और जो साक्ष्य या प्रमाण आप ला रहे हैं, उसमें कुछ नहीं है। यह गंभीर मसला है लिहाजा आप ऐसा प्रमाण लाए जिस पर हम विचार कर सकें। पीठ अब इस मामले पर 14 दिसंबर को सुनवाई करेगी।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 और 2014 में आयकर विभाग ने सहारा और बिरला समेत कुछ कॉरपोरेट घरानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में जब्त डायरियों से यह खुलासा हुआ है कि कुछ कॉरपोरेट घरानों द्वारा कुछ मुख्यमंत्रियों और नेताओं को पैसे देने की बात है। आरोप लगाया गया है कि इनमें कॉरपोरेट घराने द्वारा नरेन्द्र मोदी को भी पैसे दिए गए थे, जब वह गुजरात में मुख्यमंत्री थे।