सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति को लेकर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने समिति को किसानों को सुनने और हमारे पास आने और अपनी रिपोर्ट दर्ज करने की शक्ति दी है। इसमें पक्षपात की बात क्या है? समिति पर उठ रहे सावलों पर सीजेआई ने कहा कि समिति के सदस्यों को निर्यण लेने की कोई शक्ति नहीं दी गई है, उन्हें सिर्फ हमें रिपोर्ट करना होगा। इसमें पूर्वाग्रह का सवाल कहां है? अगर आप समिति के सामने पेश नहीं होना चाहते हैं, तो मत आइए, लेकिन किसी को इस तरह से बदनाम मत करिए और अदालत पर लांछन मत लगाइए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आप समिति के किसी सदस्य पर केवल इस लिए आक्षेप लगा रहे हैं क्योंकि उसने कृषि कानूनों पर राय व्यक्त की है।
आंदोलन कर सकते हैं, लेकिन शांति भंग नहीं : कोर्ट
प्रधान न्यायाधीन ने कहा कि अगर हम कृषि कानूनों को बरकरार रखते हैं, तो किसान आंदोलन कर सकते हैं, लेकिन शांति बनाए रखनी होगी। वहीं आठ किसान संगठनों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने सीजेआई को बताया कि किसान केवल आउटर रिंग रोड पर शांतिपूर्ण तरीके से गणतंत्र दिवस मनाना चाहते हैं। वे शांति भंग नहीं करेंगे।
समिति को लेकर नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत की ओर से समिति को पुनर्गठित करने की मांग करते हुए दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किया है। बता दें कि इस समिति से एक सदस्य ने खुद को अलग कर लिया है।
बता दें कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 56 दिन से लगातार कड़ाके की ठंड में राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 26 जनवरी को ये किसान दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने की तैयारी में हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के विरोध में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि 26 जनवरी को किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और यह फैसला करने का पहला अधिकार पुलिस को है कि राष्ट्रीय राजधानी में किसे प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए और किसे नहीं।