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SC: सुप्रीम कोर्ट ने डीके शिवकुमार को दी राहत तो सीबीआई को लगा झटका, सुनवाई 14 जुलाई तक स्थगित

Wed, 17 May 2023 01:51 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। वहीं दूसरे मामले में, SC ने बीवी श्रीनिवास के खिलाफ दर्ज उत्पीड़न के एक मामले में उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने डीके शिवकुमार को दी राहत। - फोटो : social media
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में जांच पर अंतरिम रोक से संबंधित कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई 14 जुलाई तक स्थगित कर दी।

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने शिवकुमार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया कि मामले में 23 मई को उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में अलग-अलग तारीखों पर रोक को और बढ़ा दिया गया। आयकर विभाग ने 2017 में शिवकुमार के खिलाफ छापा मारा था, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी।

ईडी की जांच के बाद सीबीआई ने बाद में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी। मंजूरी 25 सितंबर, 2019 को मिली और तीन अक्टूबर, 2020 को शिवकुमार पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

शिवकुमार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया और अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मंजूरी एवं कार्रवाई को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें बार-बार नोटिस जारी करके उन पर मानसिक दबाव बना रही थी जबकि मामला 2020 का है।

 

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उत्पीड़न मामले में युवा कांग्रेस अध्यक्ष को राहत

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास के खिलाफ दर्ज उत्पीड़न के एक मामले में बुधवार को उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। असम में पार्टी की एक नेता ने श्रीनिवास पर मानसिक यातना देने का आरोप लगाया था, जिसे अब कांग्रेस से निष्कासित किया जा चुका है।

असम युवा कांग्रेस की निष्कासित अध्यक्ष अंगकिता दत्ता द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले में श्रीनिवास ने अपनी अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करने के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने असम सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर 10 जुलाई तक मामले में उनसे जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि हमने (सीआरपीसी की धारा) 164 के तहत दिया गया बयान पढ़ा है जिसे अभियोजन पक्ष ने बड़ी शालीनता से हमारे समक्ष रखा है। हम इस स्तर पर राज्य के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते। प्राथमिकी दर्ज होने में एक महीने की देरी पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम संरक्षण का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने श्रीनिवास को जांच में सहयोग करने और 22 मई को पुलिस के समक्ष उपस्थित होने का भी निर्देश दिया।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम युवा कांग्रेस की निष्कासित अध्यक्ष अंगकिता दत्ता द्वारा दर्ज मामले में गत पांच मई को श्रीनिवास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें, दत्ता ने 18 अप्रैल को सिलसिलेवार ट्वीट करके श्रीनिवास के खिलाफ मानसिक यातना देने के आरोप लगाए थे।

मणिपुर हिंसा : विश्वास बढ़ाने, शांति व स्थिरता बहाली के लिए कदम उठाने का दिया निर्देश

मणिपुर में फैली जातीय हिंसा पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को विश्वास बढ़ाने और शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है और सर्वोच्च न्यायालय होने के नाते वह सुनिश्चित कर सकता है कि सरकार अपनी शक्ति का प्रयोग करे और स्थिति से आंखें नहीं मूंदे। अदालत के रूप में हमें यह भी समझना चाहिए कि कुछ मामले सरकार को सौंपे गए हैं और हमें उस पर ही छोड़ देना चाहिए। अदालत ने हिंसा पीड़ितों की सुरक्षा, राहत और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों पर भी स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ को एक वकील की ओर से बताया गया कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कथित भड़काऊ ट्वीट्स किए गए। इस पर पीठ ने केंद्र व राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सांविधानिक अथॉरिटी संयम से काम ले और भड़काऊ बयान न दे।

कुकी और अन्य आदिवासी समुदायों की सुरक्षा आशंकाओं पर पीठ ने गौर किया और आदेश दिया कि मुख्य सचिव और उनके सुरक्षा सलाहकार आदिवासियों की ओर से बताए गए गांवों में स्थिति का आकलन करेंगे और वहां शांति और सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएंगे। पीठ ने यह भी कहा कि आदिवासी आरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट की खंडपीठ जा सकते हैं।
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जाति आधारित सर्वेक्षण : सुनवाई से जस्टिस करोल ने खुद को किया अलग

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय करोल ने बुधवार को जाति आधारित सर्वेक्षण कराने के बिहार सरकार के निर्णय पर रोक लगाने के पटना हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति से पहले जस्टिस करोल पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। जस्टिस करोल ने कहा कि उन्होंने इस मामले को हाईकोर्ट में निपटाया था। यह याचिका बुधवार को जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई थी। इसके बाद पीठ ने निर्देश दिया कि उपयुक्त पीठ के गठन के लिए इस मामले को सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष रखा जाए। 
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