उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में जांच पर अंतरिम रोक से संबंधित कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई 14 जुलाई तक स्थगित कर दी।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने शिवकुमार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया कि मामले में 23 मई को उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में अलग-अलग तारीखों पर रोक को और बढ़ा दिया गया। आयकर विभाग ने 2017 में शिवकुमार के खिलाफ छापा मारा था, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी।
ईडी की जांच के बाद सीबीआई ने बाद में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी। मंजूरी 25 सितंबर, 2019 को मिली और तीन अक्टूबर, 2020 को शिवकुमार पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
शिवकुमार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया और अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मंजूरी एवं कार्रवाई को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें बार-बार नोटिस जारी करके उन पर मानसिक दबाव बना रही थी जबकि मामला 2020 का है।
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास के खिलाफ दर्ज उत्पीड़न के एक मामले में बुधवार को उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। असम में पार्टी की एक नेता ने श्रीनिवास पर मानसिक यातना देने का आरोप लगाया था, जिसे अब कांग्रेस से निष्कासित किया जा चुका है।
असम युवा कांग्रेस की निष्कासित अध्यक्ष अंगकिता दत्ता द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले में श्रीनिवास ने अपनी अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करने के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने असम सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर 10 जुलाई तक मामले में उनसे जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि हमने (सीआरपीसी की धारा) 164 के तहत दिया गया बयान पढ़ा है जिसे अभियोजन पक्ष ने बड़ी शालीनता से हमारे समक्ष रखा है। हम इस स्तर पर राज्य के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते। प्राथमिकी दर्ज होने में एक महीने की देरी पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम संरक्षण का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने श्रीनिवास को जांच में सहयोग करने और 22 मई को पुलिस के समक्ष उपस्थित होने का भी निर्देश दिया।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम युवा कांग्रेस की निष्कासित अध्यक्ष अंगकिता दत्ता द्वारा दर्ज मामले में गत पांच मई को श्रीनिवास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें, दत्ता ने 18 अप्रैल को सिलसिलेवार ट्वीट करके श्रीनिवास के खिलाफ मानसिक यातना देने के आरोप लगाए थे।