सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) बंगलूरू को निर्देश दिया है कि वह शनिवार को अलग से प्रवेश परीक्षा करा सकती है। साथ ही स्पष्ट हिदायत दी कि उसकी अनुमति के बिना न परिणाम जारी किए जाएंगे और न ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिका के लंबित रहने तक परिणाम जारी करने और प्रवेश देने की अनुमति नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने एनएलएसआईयू और अन्य को याचिका पर जवाब देने के लिए नोटिस भी जारी किया है। संस्थान के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ आर वेंकट राव और एक अन्य पीड़ित अभिभावक ने एनएलएसआईयू बंगलूरू के अचानक क्लैट-2020 से निकलने के फैसले को चुनौती दी है।
गौरतलब है कि एनएलएसआईयू बंगलूरू ने इस साल क्लैट की जगह 12 सितंबर को ऑनलाइन नेशनल लॉ एप्टीट्यूड टेस्ट (एनएलएटी) कराने का फैसला किया था। वहीं कॉमन लॉ एडमीशन टेस्ट (क्लैट-2020) 28 सितंबर को है।