अगर सदन की कार्यवाही चली तो गृह मंत्री अमित शाह संसद के दोनों सदनों में दिल्ली हिंसा पर बयान दे सकते हैं। अपने बयान में गृह मंत्री हिंसा के कारणों और इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दे सकते हैं। हालांकि गृह मंत्री का बयान होगा या नहीं यह सदन की स्थिति पर निर्भर करेगा।
आपत्तिजनक बयानों पर भी मचेगा कोहराम
विपक्ष की रणनीति दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद प्रवेश वर्मा, पूर्व विधायक कपिल मिश्रा के बयान को उठाने की होगी। कांग्रेस का आरोप है कि इन नेताओं के बयानों के कारण दिल्ली का सांप्रदायिक माहौल खराब हुआ।
दूसरी ओर इसके उलट भाजपा का कहना है कि विपक्षी नेताओं ने नागरिकता संशोधन कानून पर भ्रम फैला कर और एक विशेष वर्ग को उकसा कर सांप्रदायिक माहौल खराब किया।
सहयोगी अकाली और जदयू पर होगी नजर
दिल्ली हिंसा मामले में संसद में सबकी निगाहें भाजपा की सहयोगी अकाली दल और जदयू पर होगी। अकाली दल ने दिल्ली हिंसा मामले में सरकार की मंशा पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए हैं, जबकि जदयू ने अब तक इस मामले में चुप्पी साध रखी है। अगर इन दोनों दलों ने संसद में मोर्चा खोला तो सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।