सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर, एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के पीछे एक ही दक्षिणपंथी संगठन का हाथ है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह दावा किया है। हालांकि जांच एजेंसी कम्युनिस्ट नेता गोविंद पनसारे की हत्या से इस संगठन के तार नहीं जोड़ सकी हैं। अधिकारी ने कहा, ‘जांच के दौरान यह सामने आया कि दाभोलकर, लंकेश और कलबुर्गी की हत्या में एक जैसी मानसिकता वाले गिरोह शामिल थे। इन गिरोह के सदस्यों के संबंध सनातन संस्था और हिंदू जनजागृति समिति से है। हिंदू धर्म के खिलाफ आवाज उठाने के कारण तीनों की हत्या की गई।’
पिछले महीने नालासोपारा से विस्फोटकों की जब्ती के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान गिरफ्तार शरद कालसकर ने दाभोलकर हत्याकांड में शामिल होना स्वीकार किया था। उनकी निशानदेही पर महाराष्ट्र एटीसी और सीबीआई ने औरंगाबाद से सचिन अंदुरे को गिरफ्तार किया। दोनों ने पुणे में गोली मारकर दाभोलकर की हत्या की थी। इससे पहले सीबीआई ने वीरेंद्र सिंह तावड़े को गिरफ्तार किया था, जो दाभोलकर हत्याकांड का मास्टरमाइंड था। जांच में यह पता चला कि तावड़े ने ही दाभोलकर, लंकेश और कलबुर्गी की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
गौरतलब है कि दाभोलकर की अगस्त 2013 में पुणे में हत्या कर दी गई थी । पनसारे को कोल्हापुर में 16 फरवरी, 2015 को गोली मार दी गई थी। पिछले साल सितंबर में बंगलुरू में लंकेश की उनके घर के बाहर हत्या कर दी गई थी। 30 अगस्त 2015 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले में कलबुर्गी की घर के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।