राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च निर्णायक समिति अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का आयोजन जुलाई के मध्य में होने के आसार हैं। इस सभा में ही संघ के वार्षिक कैलेंडर के शेष हिस्से पर विचार करते हुए सभी आयोजनों की तारीखें तय की जाएंगी। इनमें प्रांत प्रचारकों की बैठक भी शामिल हैं। बता दें कि मार्च में कोरोना वायरस प्रसार के कारण रद्द कर दी गई सर्वोच्च समिति की बैठक का तब से अब तक आयोजन नहीं हो पाया था।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि क्या प्रांत प्रचारक सभा का आयोजन किया जाए या इसे आगे के लिए स्थगित कर दिया जाए। प्रांत प्रचारक सभा संघ के तीन अहम वार्षिक आयोजनों में अखिला भारतीय प्रतिनिधि सभा के बाद दूसरे नंबर की हैसियत रखती है। तीसरा नंबर अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल का होता है, जिसका आयोजन दीपावली के आसपास किया जाता है। प्रांत प्रचारक सभा में समीक्षा करने, योजना बनाने और संगठन से जुड़े लक्ष्यों को यूनिटों व विभागों में बांटने का काम किया जाता है।
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि बैठक का आयोजन होगा या नहीं, इसका निर्णय 15 जुलाई तक कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, पिछले साल तैयार किए गए कैलेंडर में बैठक प्रस्तावित की गई थी। हालांकि इसे पहले से तय तारीख पर आयोजित करने या नहीं करने का निर्णय 15 जुलाई तक कर लिया जाएगा। यह देश में कोरोना संक्रमण के हालात और इस बात पर निर्भर करेगा कि इसमें भाग लेने वाले लोग उस दौरान यात्रा कर सकते हैं या नहीं।
बता दें कि इस बैठक की अहमियत इसलिए है कि इसमें केवल राज्यों के प्रांत प्रचारक और उनसे जुड़े हुए लोग भी भाग लेंगे। इस बैठक के आयोजन का लक्ष्य संघ की गतिविधियों पर मंथन करना और सालाना कैलेंडर की समीक्षा करना है। साथ ही संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के कार्यक्रमों के आयोजन पर भी प्रचारक इस बैठक में निर्णय लेते हैं।
यदि बैठक को जुलाई अंत में कराए जाने का निर्णय लिया गया तो हर राज्य से शीर्ष दो प्रचारकों को इसमें भाग लेने के लिए बुलाया जाएगा। पिछले साल कैलेंडर में इस बैठक का आयोजन चित्रकूट में कराने का निर्णय लिया गया था। लेकिन अब बैठक का आयोजन संघ मुख्यालय के शहर नागपुर में कराने का निर्णय लिया गया है।