छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश की हार पिछले पांच सालों के दौरान मोदी-शाह के लिए सबसे बड़ा झटका है। वे दिल्ली हारे लेकिन वहां कांग्रेस नहीं जीती थी। भाजपा पंजाब में भी हारी थी लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की भारी जीत के आगे वह दब गई। वैसे भी पंजाब में अकाली दल ही हारा, भाजपा तो उसकी जूनियर सहयोगी थी।
इन तीन राज्यों में भाजपा मोदी, शाह और योगी के जबरदस्त प्रचार के बावजूद हार गई। इस दौरान योगी ने सबसे ज्यादा 74 जनसभाएं कीं जिसमें राजस्थान में 26, छत्तीसगढ़ में 23, तेलंगाना में 8 और मध्य प्रदेश में 17। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 56 जनसभा कीं, मध्य प्रदेश में 23, राजस्थान में 15, तेलंगाना में 10 और छत्तीसगढ़ में 8। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 रैलियां कीं, मध्य प्रदेश में 10, राजस्थान में 12, तेलंगाना में 5 और छत्तीसगढ़ में चार।
इन सबके बावजूद तेलंगाना में भाजपा केवल एक सीट जीतने में कामयाब हुई और छत्तीसगढ़ में 16। राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी उसे हार मिली। राम मंदिर से लेकर बजरंग बली तक सभी का जिक्र किया गया लेकिन नतीजों से जाहिर है कि प्रखर हिंदुत्व का मुद्दा भी इन चुनावों को भाजपा के पक्ष में लाने में असफल रहा यानी शाह-योगी-मोदी भी भाजपा को चुनाव नहीं जिता सकते यदि एंटी इनकमबेंसी बहुत ज्यादा हो तो। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अब भाजपा को किसान, दलित और युवाओं को साधने की जरूरत है। साथ ही खुद से छटक रहे सहयोगी दलों की जगह नए दलों को शामिल करने पर भी ध्यान देना होगा।