सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारतीय इतिहास को उल्लेखित करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश था। पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान का कोई वजूद नहीं था। ये सब देष एक थे और इनपर हिंदू साम्राज्य का शासन था। कोर्ट ने कहा कि मुगल जब यहां आए तो उन्होंने भारत के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया। इसी दौरान बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन हुए। इसके बाद अंग्रेज यहां आए और शासन करने लगे।
भारत-पाक विभाजन के इतिहास के बारे में कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह एक अविवादित तथ्य है कि विभाजन के वक्त लाखों की संख्या में हिंदू व सिख मारे गए थे। उन्हें प्रताड़ित किया गया था और महिलाओं का यौन शोषण किया गया था। कोर्ट ने लिखा कि भारत का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था। पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था। ऐसे में भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था लेकिन, इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखा गया।
जज सेन ने मोदी सरकार को लेकर कहा कि वह भारत को मुस्लिम राष्ट्र नहीं बनने देंगे। उन्होंने लिखा कि किसी भी व्यक्ति को भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जज ने उच्च न्यायालय में केंद्र की सहायक सॉलिसीटर जनरल ए. पॉल को फैसले की प्रति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह व विधि मंत्री को मंगलवार तक अवलोकन के लिए सौंपने व समुदायों के हितों की रक्षा की खातिर कानून लाने को लेकर जरूरी कदम उठाने की बात कही है।
बता दें कि केंद्र के नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग छह साल भारत में रहने के बाद भारतीय नागरिकता के हकदार हैं, लेकिन अदालत के आदेश में इस विधेयक का जिक्र नहीं किया गया है।