कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे प्रभावशाली नेता के तौर पर उभरे हैं। हालांकि वह इस दावे से सहमत नहीं हैं कि ये नतीजे नोटबंदी पर जनमत संग्रह हैं।
चिदंबरम ने कहा, ‘विधानसभा चुनावों के इन नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी देश की सबसे प्रभावशाली शख्सियत हैं। उनकी अपील देशव्यापी है।’ उन्होंने यह बात यहां इंडियन मर्चेंट चैंबर में एक कार्यक्रम के दौरान कही।
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा को संसद के ऊपरी सदन में बहुमत प्राप्त हो जाएगा। इससे एनडीए सरकार के लिए अपने बचे हुए कार्यकाल के दौरान आर्थिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण सुधार शुरू करना संभव हो सकेगा। यूपी और उत्तराखंड में भाजपा को मिले प्रचंड जनादेश के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी आई है।
कई राजनीतिक पंडित इन नतीजों को पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले पर हुए जनमत संग्रह के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि पूर्व वित्तमंत्री ऐसा नहीं मानते। नोटबंदी के बड़े आलोचक चिदंबरम ने कहा कि इसे यूपी में भाजपा की जीत का कारण बताना इसका एक ‘साधारण निष्कर्ष’ निकालना होगा।
चुनाव के दौरान कई दूसरे कारणों ने भी अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ये नतीजे 500 और 1000 रुपये के नोटों को अचानक से बंद कर देने के फैसले पर ‘जनमत संग्रह’ नहीं हैं। चिदंबरम ने इस धारणा को भी खारिज कर दिया कि यूपी में जातीय समीकरण ध्वस्त हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि ‘मैं नहीं मानता की जातीय समीकरण हमेशा के लिए खत्म हो गए हैं।’ चिदंबरम ने एक नेता को मिले जनादेश के लिए 1971, 1980 और 1984 का उदाहरण दिया और कहा कि तब भी ऐसी बातें कही गईं थीं।